बैहना जट्टां के डोल गांव में मनाई गई सावित्री बाई फुले की जयंती
महिलाओं के उत्थान करने के लिए संगठित प्रयास का किया आह्वान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बैहना जट्टां पंचायत के डोल गांव में देश की प्रथम महिला शिक्षिका और महिलाओं के उत्थान की अग्रणी सावित्री बाई फुले की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कविताओं और लघु नाटिका के माध्यम से सावित्री बाई फुले को श्रद्धांजलि दी गई।
इस कार्यक्रम में महिला मंडल धड़वाली, बैहना जट्टां, कोठी, दुर्गा सेवा समिति डोल, अनुसूचित जाति युवा विंग, रविदास महासभा बैहना जट्टां, संयुक्त संघर्ष मोर्चा के सदस्य और पदाधिकारी शामिल हुए। महिला मंडल बैहना जट्टां की प्रधान मीरा देवी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र में हुआ था। उनके साथ क्रांतिकारी पति ज्योतिबा फुले का भी योगदान रहा।
उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए नारी मुक्ति आंदोलन की शुरुआत की और शिक्षा को एक सशक्त हथियार बना कर 18 स्कूल केवल महिलाओं के लिए खोले। महिला मंडल डोल की महासचिव निर्मला देवी ने कहा कि सावित्री बाई फुले का योगदान न सिर्फ महिलाओं के लिए, बल्कि समाज के वंचित तबकों के लिए भी अद्वितीय था।
इस अवसर पर नारी शिक्षा एवं उत्थान पर आधारित कविताओं और लघु नाटिका के माध्यम से सावित्री बाई फुले को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में देवकी देवी, रत्नी देवी, बसंती देवी, रीता, मीरा, जमना देवी सहित कई लोग उपस्थित थे। सावित्री बाई फुले का संपूर्ण जीवन समाज के वंचित वर्ग और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता। उनकी शिक्षाओं और संघर्षों ने समाज की मानसिकता में बदलाव लाया, जिससे आज महिलाएं समान अधिकारों के साथ समाज में योगदान दे रही हैं।