फार्माकोलॉजी विभाग में बनाया मॉनिटरिंग केंद्र
एम्स बिलासपुर लोगों को कर रहा एडीआर पर जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। दवा का प्रतिकूल प्रभाव होने पर मरीज इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं। दवाएं स्वास्थ्य देखभाल का अनिवार्य हिस्सा हैं। दवाओं के उपयोग के साथ एडवर्स ड्रग रिएक्शन (एडीआर) नामक अवांछित प्रभाव हो सकते हैं। एम्स बिलासपुर इस विषय पर काम कर रहा है और लोगों को जागरूक भी कर रहा है।
एम्स बिलासपुर की डॉ. मीनाक्षी मीनू और डॉ. दीप्ति चोपड़ा ने बताया कि दवा के प्रतिकूल प्रभाव जैसे उल्टी या चक्कर आना या अधिक गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। एडीआर के समय दवा लेना बंद करना और शीघ्र डॉक्टर से संपर्क करना महत्वपूर्ण है। डॉक्टर यह पता लगाने में मदद करते हैं कि लक्षण दवा से संबंधित हैं या नहीं। साथ ही आगामी उपचार और सलाह देते हैं। डॉक्टर से परामर्श किए बिना अन्य दवाएं या घरेलू उपचार नहीं लेना चाहिए। यह स्वास्थ्य को खराब कर सकता है या नई समस्याएं भी पैदा कर सकता है। किसी भी एडीआर का व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाए रखना भविष्य की स्वास्थ्य देखभाल के लिए उपयोगी है। साथ ही नई दवाओं के साथ इस तरह की प्रतिक्रियाओं से बचने में मदद कर सकता है। इन प्रतिक्रियाओं की रिपोर्ट करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
एडीआर की रिपोर्टिंग एक डॉक्टर को समान समस्याओं वाले अन्य लोगों के जीवन को बचाने और इन प्रतिक्रियाओं के बारे में नया ज्ञान प्राप्त करने में मदद करता है।
एडीआर रिपोर्ट करने का तरीका
एडीआर की सूचना राष्ट्रीय निशुल्क फार्माकोविजिलेंस हेल्पलाइन 1800-180-3024 पर कॉल करके दी जा सकती है। मोबाइल एप एडीआर पीवीपीआई के माध्यम से भी रिपोर्ट किया जा सकता है। इसके अलावा pvpi.compatgmail.com पर ईमेल और 0120 2783311 पर फैक्स भी कर सकते हैं। एडीआर में एलोपैथिक, होम्योपैथिक और हर्बल दवा से संबंधित सूचना दी जा सकती है। चाहे प्रतिक्रिया गंभीर हो या मामूली। एडीआर की रिपोर्ट निकटतम एडीआर निगरानी केंद्र को की जा सकती है। एम्स बिलासपुर में फार्माकोलॉजी विज्ञान विभाग में एडीआर मॉनिटरिंग केंद्र (एएमसी) की स्थापना की गई है। अधिक जानकारी के लिए इस केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं।
संस्थान मरीज की सुरक्षा और एडीआर रिपोर्टिंग को बढ़ावा दे रहा है। लोगों द्वारा और लोगों के लिए एडीआर की रिपोर्ट करने की संस्कृति बनाने की आवश्यकता है। दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना भी इसका उद्देश्य है। इसके लिए सभी का सहयोग आवश्यक है।
प्रो. डॉ. दीप्ति चोपड़ा, फार्माकोलॉजी विभाग, एम्स बिलासपुर