100 रेशम कीट पालकों को भी मिली मदद,रेशम कीट पालन गृह बनाने के लिए मिलेंगे 1.85 लाख
घुमारवीं में 100 से अधिक लाभार्थियों को बांटे प्रमाणपत्र और स्टाइपेंड के चेक
महिलाएं घर से शुरू कर सकती हैं खाद्य प्रसंस्करण का कारोबार : धर्माणी
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। महिलाएं घर से अचार, चटनी, जैम और पेस्ट जैसे खाद्य उत्पाद तैयार कर स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं। बाजार में इन उत्पादों की पहचान बनाने के लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग और लेबलिंग पर ध्यान देना जरूरी है। घुमारवीं के सेरीकल्चर संस्थान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने 100 से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और स्टाइपेंड के चेक बांटे। इस दौरान जिले के 100 रेशम कीट पालकों को पालन गृहों के निर्माण के लिए स्वीकृति पत्र भी दिए गए।
सिल्क समग्र योजना के तहत प्रत्येक चयनित रेशम कीट पालक को पालन गृह बनाने के लिए 1.85 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके लिए कुल 1.85 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। धर्माणी ने कहा कि रेशम कीट पालन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का अच्छा साधन बन सकता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण और स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने के साथ आकर्षक पैकेजिंग, उचित लेबलिंग और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित करना जरूरी है। इससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों की पहचान बनाने और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
धर्माणी ने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि रासायनिक पदार्थों के अनियंत्रित इस्तेमाल का पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कृषि, प्राकृतिक खेती, दुग्ध उत्पादन और स्वरोजगार के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास कर रही है। किसानों और पशुपालकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने तथा स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उद्योग विभाग और हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम की ओर से आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (आरएएमपी) कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत प्रदेश के सभी 12 जिलों की 700 महिला उद्यमियों को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के अनुरूप उद्यमिता का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। इसमें स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और ग्रामीण व अर्धशहरी क्षेत्रों की इच्छुक महिलाओं के साथ पहले से कारोबार कर रही महिलाओं को भी शामिल किया गया है।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण और जैविक खेती की जानकारी दी गई। अचार, चटनी, जैम और पेस्ट जैसे उत्पाद तैयार करने के तरीके सिखाने के साथ प्राकृतिक कृषि उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की तकनीकी दक्षता, व्यवसाय प्रबंधन और डिजिटल कौशल विकसित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ाना है।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के राज्य समन्वयक अतुल करोहटा, महाप्रबंधक अमित कालथाइक, सेक्टर स्पेशलिस्ट (ट्रेनिंग) कपिल भारद्वाज और जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक मनोज कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।