-नई पीढ़ी को मिट्टी के बर्तन बनाने की कला से परिचित कराना है उद्देश्य
माटी कला प्राकृतिक और मानवीय संबंधों को करती है सशक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता(बिलासपुर)। जिले के विकासखंड झंडूता के गांव ठप्पर में शनिवार को एक विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू की गई। यह कार्यशाला खादी और ग्रामोद्योग आयोग, राज्य कार्यालय शिमला के कार्यकारी ग्रामोद्योग अधिकारी धर्मपाल की उपस्थिति में शुरू हुई।
इस आयोजन का उद्देश्य कुम्हारों की पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करना और नई पीढ़ी को मिट्टी के बर्तन बनाने की कला से परिचित कराना है। कार्यशाला का आयोजन केंद्र सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के खादी ग्रामोद्योग आयोग के सौजन्य से कुम्हार सशक्तीकरण मिशन के अंतर्गत किया गया। इस मिशन के तहत पारंपरिक हस्तकला को बढ़ावा देना और शिल्पकारों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करना लक्ष्य है। इसमें बड़ी संख्या में शिल्पकारों और कला प्रेमियों ने भाग लिया। मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रसिद्ध उद्यमी सुमन प्रजापति ने इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मिट्टी से बर्तन बनाने की कला प्राकृतिक और मानवीय संबंधों को सशक्त करती है। उन्होंने इस कला को धैर्य, रचनात्मकता और पारंपरिक ज्ञान का प्रतीक बताया। प्रजापति ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक कुम्हार कला को जीवित रखना और उसे आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुसार ढालना है, ताकि शिल्पकार और युवा दोनों इसका लाभ उठा सकें।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को मिट्टी चयन, बर्तन बनाने की तकनीक, डिजाइनिंग, पकाने की प्रक्रिया के बारे में गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। मास्टर ट्रेनर अनिल और राजकुमार ने बताया कि कार्यशाला में मिट्टी तैयार करने, चाक पर बर्तन बनाने और सजाने की विधियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। धर्मपाल ने बताया कि कार्यशाला का समापन 30 दिसंबर को एक प्रदर्शनी के रूप में होगा, जहां प्रतिभागी अपने द्वारा बनाए गए बर्तनों का प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शनी से शिल्पकारों को अपनी कला को प्रदर्शित करने और नए संभावित बाजारों से जुड़ने का मौका मिलेगा।