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Bilaspur News: अपणी गल तू अप्पू ई सोच, हूण तां रिश्तेयां विच बी भरोया खोट

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जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल को सम्मानित करते साहित्यकार व अन्य । स्रोत : स्वयं
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-संस्कृति भवन के बैठक कक्ष में मासिक गोष्ठी का हुआ आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर ने मुख्यालय स्थित संस्कृति भवन के बैठक कक्ष में मासिक गोष्ठी की इसकी अध्यक्षता जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने की।
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बुद्धि सिंह चंदेल ने न ग्रीष्म ऋतु, न शरद ऋतु, न बरसात का पानी, केवल बसंत ही है सब ऋतुओं की रानी, जीत राम सुमन ने अपणी गल तू अप्पू ई सोच, हूण तां रिश्तेयां विच बी भरोया खोट, केशव शर्मा ने चाय की प्याली में बसती है रंगीन जिंदगानी, गर्म है तो चाय है, ठंडी हो जाए तो बस पानी, अमरनाथ धीमान ने गम के बादल जब छट जाए खुशी का इजहार कर लेना, जिंदगी में गम कभी कम न होंगे, सहते-सहते तुम सह लेना रचना प्रस्तुत की। कर्मवीर कंडेरा ने नशा, जहर बेच कर कमा रहे हैं पैसा, सुरेंद्र मिन्हास ने न्हेरे न्हेरे हऊं चल्या घराटा, पैर बी चीफले मुईया बाटा, रविंद्र कुमार शर्मा ने मौसम में कैसा यह परिवर्तन आ गया फरवरी माह में आम पर बौर छा गया, सर्दी में ही पानी के लिए हो रही त्राहिमाम सर्दियों का भी अंत जैसे आ गया रचना प्रस्तुत की। हुसैन अली ने बेच कर तस्वीरें बेवश फकीरों की, वो जनाब तो अमीर हो गए, रक्षा ठाकुर ने उफ्फ आज देखा यमुना का किनारा, रविंद्र शर्मा ने तीर्थों के अधिराज प्रयागराज पर पत्र पढ़ा, चिंता देवी ने लोक गीत प्रस्तुत किया। शीला सिंह ने वन-उपवन खिल महक रहे है, आए है ऋतुराज, अंग-अंग नव रंग भरा अब, प्रीत रीत के साज, राज कुमार कौंडल ने नशे के ऊपर क्रूर गोद शीर्षक पर रचना प्रस्तुत की। देवेंद्र ठाकुर ने महाशिवरात्रि आई है, रवींद्र भट्टा ने सच्चा ब्रह्म ज्ञानी पर पत्रवाचन पढ़ा। रवींद्र चंदेल कमल ने कवियों की वाणी, माधुर्य खो बैठी, निष्पक्ष होना भूल गई, अरुण डोगरा ने दिल लौटना चाहता है, सुमन चड्डा ने प्यार का जवाब शीर्षक से रचना प्रस्तुत की। बृजलाल लखनपाल ने नशे से नाश, नाश, नाश और अब कुनबा नाश वंशनाश, कौशल्या कुमारी ने प्राणी अपने प्रभु से पूछे किस विधि पाऊं तोहें, सुशील पुंडीर ने झड़ियां नी हुईयां इस बार, सुक्की गए सब हार, इंद्र सिंह चंदेल ने पहाड़ी लोकगीत भला साधू जोगिया हो मोया कांगड़े रे बन्ने प्रस्तुत किया। बीरबल धीमान ने जे अस्से कठे रेहंगे तीसरी कोई रीस नी हुंदी, प्रेमा च रहने री कोई फीस नी होंदी। इसके अलावा राम पाल डोगरा, एसआर आजाद, सुभाष चंद, कुसुम, साक्षी, अंजली देवी, प्यारी देवी, ज्योति कुमारी, पूजा ने भी अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। इस दौरान सभी साहित्यकारों/कलाकारों ने जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल को कार्यभार ग्रहण करने पर शॉल, टोपी पहनाकर सम्मानित किया। जिला भाषा अधिकारी ने सभी साहित्यकारों, कलाकारों द्वारा उन्हें सम्मानित करने पर उनका आभार प्रकट किया। उन्होंने बताया कि विभाग साहित्यकारों, कलाकारों के लिए मंच प्रदान करने के लिए सदैव प्रयासरत है और भविष्य में कार्यालय द्वारा जिले के स्वर्गीय साहित्यकारों/कलाकारों की स्मृति में समय-समय पर कवि सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा साहित्यकार से मिलिए कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी, ताकि उनको याद किया जा सके।
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