ग्राउंड रिपोर्ट
1,000 रुपये निकालने के लिए भी खर्च करने पड़ते सैकड़ों
झील किनारे बसे गांवों में अधिकांश परिवार भाखड़ा विस्थापित
दशकों बाद भी भाखड़ा विस्थापितों की मुश्किलें कायम
बैंक जाने में पूरा दिन खराब, मजदूरी भी छूटती है
बुजुर्ग और महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल
सुभाष कपिल
झंडूता(बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र के कोटधार इलाके के अति दुर्गम गांवों में रहने वाले लोगों को आजादी के कई दशक बाद भी मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं हो पाई हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण धनी, पपलोआ और मलराओं ग्राम पंचायतों के वे गांव हैं, जो गोबिंद सागर झील के किनारे बसे हुए हैं और जहां की अधिकांश आबादी भाखड़ा परियोजना से विस्थापित परिवारों की है। विकास के दावों के बीच इन गांवों के लोगों को आज भी बैंक जैसी आवश्यक सुविधा के लिए 45 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदेश में सरकार चाहे किसी भी दल की रही हो, लेकिन उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। कोटधार क्षेत्र में बागछाल पुल बनने से इलाके के एक हिस्से की तस्वीर जरूर बदली है। सड़क संपर्क सुधरने के बाद उस ओर बैंक सहित कई सुविधाएं घर द्वार तक पहुंच गई हैं, जिससे लोगों को राहत मिली है। लेकिन झील के दूसरी तरफ बसे गांवों के लोग आज भी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास केवल क्षेत्र के एक हिस्से तक सीमित रह गया है, जबकि दूसरी ओर रहने वाले हजारों लोगों को अभी भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। बैंक सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को छोटा सा काम करवाने के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बुजुर्गों को पेंशन या एक-दो हजार रुपये निकालने के लिए वाहन किराए पर लेकर झंडूता आना पड़ता है। कई बार किराया ही 500 से 800 रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि कई बार बैंक जाने में पूरा दिन लग जाता है और मजदूरी करने वाले लोगों की दिहाड़ी भी छूट जाती है।
इनसेट
एक तरफ आधा दर्जन बैंक, दूसरी तरफ एक भी नहीं
स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार कोटधार के एक हिस्से में लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में आधा दर्जन से ज्यादा बैंक शाखाएं मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर खरली से जड्डू तक करीब 45 किलोमीटर क्षेत्र में एक भी बैंक सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस वजह से धनी, पपलोआ, मलराओं सहित आसपास के करीब एक दर्जन गांवों की लगभग दस हजार आबादी प्रभावित हो रही है। लोगों में इस असमान विकास को लेकर गहरी नाराजगी है। संवाद
इनसेट
अतिरिक्त कोटे वाला क्षेत्र होने के बावजूद सुविधा का अभाव
ग्रामीणों ने सरकार से मांग उठाई है कि धनी और मलराओं के बीच गाह गड़याना क्षेत्र में हिमाचल ग्रामीण बैंक की शाखा खोली जाए। उनका कहना है कि यह स्थान केंद्र में पड़ता है और यहां पहले से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, हाई स्कूल, मिडिल व प्राइमरी स्कूल मौजूद हैं। इसके अलावा मछुआरों की दो सहकारी समितियां भी यहां कार्यरत हैं, जिससे बैंक संचालन के लिए पर्याप्त संभावनाएं हैं। यदि यहां बैंक खुलता है तो झंडूता और श्री नयना देवी विधानसभा क्षेत्र के नकारना, चलैला, कलरी, जोहड़ सुंदरी, गाह गड़याना, खरली, धनी, ससोटा, खाल सहित आसपास के गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
इनसेट
कोटधार क्षेत्र के एक हिस्से में कई बैंक शाखाएं खुल चुकी हैं, लेकिन झील पार बसे गांवों के लोगों को आज भी 40–45 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। सरकार को जल्द गाह गड़याना क्षेत्र में बैंक खोलकर लोगों को राहत देनी चाहिए।
बीना चंदेल
इनसेट
धनी, पपलोआ और मलराओं पंचायतों के हजारों लोग बैंक सुविधा से वंचित हैं। बुजुर्गों को छोटी राशि निकालने के लिए भी वाहन किराए पर लेना पड़ता है, जो बहुत बड़ी समस्या है। बैंक खुलना इस क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत है।
कुंजू राम, स्थानीय प्रतिनिधि
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हमारे इलाके में बैंक नहीं होने से लोगों को आर्थिक और मानसिक दोनों परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। मजदूरी छोड़कर बैंक जाना पड़ता है और पूरा दिन खराब हो जाता है।
देवराज डटवालिया, समाजसेवी
इनसेट
गाह गड़याना क्षेत्र बैंक खोलने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। यहां पहले से स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और सहकारी समितियां मौजूद हैं, जिससे कई पंचायतों को लाभ मिल सकता है।
कैप्टन मस्त राम
इनसेट
कोटधार के इन सभी गांव की समस्या है। इसको लेकर पहले भी सीएम से बात की है। वहीं, दोबारा इस क्षेत्र में बैंक खोलने को लेकर सीएम से मांग करेंगे। विवेक कुमार, कांग्रेस नेता झंडूता
झंडूता विधानसभा क्षेत्र के कोटधार इलाके के भाखड़ा विस्थापित गांव। संवाद
झंडूता विधानसभा क्षेत्र के कोटधार इलाके के भाखड़ा विस्थापित गांव। संवाद
झंडूता विधानसभा क्षेत्र के कोटधार इलाके के भाखड़ा विस्थापित गांव। संवाद
झंडूता विधानसभा क्षेत्र के कोटधार इलाके के भाखड़ा विस्थापित गांव। संवाद