ननावां के सकरोहा में तैयार खैर की नर्सरी। संवाद
युवाओं को दिया स्वरोज़गार और पर्यावरण बचाने का संदेश
350 पौधों का किया रोपण, शेष की घर पर तैयार कर रहे नर्सरी
पर्यावरण संरक्षण के साथ 10-15 सालों में मिलेगा मुनाफा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जहां आज का युवा नौकरी के पीछे भाग रहा है, वहीं जिले के एक युवक ने अपनी मेहनत से न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का बीड़ा उठाया है, बल्कि स्वरोजगार का रास्ता भी तैयार किया है। घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत ननावां के गांव सकरोहा निवासी राज पंडयार ने अपनी बंजर पड़ी जमीन को हरियाली में बदलने का संकल्प लिया है।
राज पंडयार ने खैर की 550 पौध खुद अपने घर पर तैयार की। उसमें से 350 पौधे उन्होंने अपनी तीन बंजर ज़मीन पर रोप दिए दिए हैं। बाकी के लगभग 200 पौधे वे वर्तमान में घर पर नर्सरी में पाल रहे हैं, जिन्हें आगामी बारिश में अन्य स्थानों पर रोपित करने की योजना है। राज पंडयार ने कहा कि खैर का वृक्ष वातावरण को शुद्ध करने में सहायक तो है ही, साथ ही इसकी लकड़ी और गोंद की बाजार में भारी मांग है। उन्होंने बताया कि एक खैर का पेड़ 10 से 15 वर्ष में तैयार होकर अच्छी आमदनी का जरिया बन सकता है। इससे न केवल प्रकृति को लाभ मिलेगा, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए यह एक दीर्घकालिक निवेश साबित हो सकता है। युवाओं से अपील की है कि वे खाली पड़ी अपनी बंजर भूमि को यूं ही न छोड़ें। उन्होंने कहा कि थोड़ा श्रम और समर्पण करके वे खैर जैसे बहु उपयोगी पौधों को लगाकर पर्यावरण को संवारने के साथ-साथ अपनी आर्थिक स्थिति को भी सशक्त बना सकते हैं। कहा कि यदि हर युवा यह बीड़ा उठा ले तो 2027 तक हिमाचल को हरित प्रदेश बनाना सिर्फ सपना नहीं, एक सच्चाई बन सकता है। कहा कि इस पहल को देखकर गांव व पंचायत के अन्य लोग भी प्रेरित हुए हैं। कहा कि यदि सरकार या वन विभाग से थोड़ा सहयोग मिले तो इस प्रकार की गतिविधियां गांव में शुरू की जा सकती हैं, जिससे न केवल जलवायु संकट से लड़ना संभव होगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया जीवन मिलेगा।