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Bilaspur News: रामकथा में सुनाई सीता स्वयंवर की कथा

Fri, 10 Apr 2026 07:11 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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बारल गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्री रामचरित मानस कथा को  सुनते लोग। संवाद
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बारल गांव में नौ दिवसीय श्री रामचरित मानस कथा का आयोजन
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श्री रामचरित मानस कथा का 15 अप्रैल को होगा समापन



संवाद न्यूज एजेंसी

बरठीं (बिलासपुर)। ग्राम पंचायत बड़गांव के बारल गांव में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमयी श्री रामचरित मानस कथा के चौथे दिन कथावाचक पंडित गोपाल स्वरूप शास्त्री ने सीता स्वयंवर का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का मार्मिक वर्णन किया गया।
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कथा के चौथे दिन मुख्य यजमान के रूप में बलदेव सिंह ने कथाव्यास को तिलक लगाकर व माल्यार्पण कर कथा का शुभारंभ करवाया। कथावाचक ने बताया कि राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का विशाल धनुष रखा था, जिसे कोई भी राजा-महाराजा उठा नहीं पाया। उन्होंने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि माता सीता ने बाल्यावस्था में ही उस धनुष को सहजता से उठाया था, जिसे देखकर राजा जनक ने प्रण लिया कि जो वीर इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में देश-विदेश के राजा-महाराजा पहुंचे, लेकिन कोई भी धनुष नहीं उठा सका। गुरु की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने जैसे ही धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ानी चाही, वह टूट गया और पूरे पंडाल में जय श्रीराम के जयघोष गूंज उठे। कथावाचक पंडित गोपाल स्वरूप शास्त्री ने ज्ञान की महत्ता बताते हुए कहा कि सच्चा ज्ञानी वही है, जिसकी दृष्टि में समस्त जगत ब्रह्ममय दिखाई देता है और जो हर स्थान पर भगवान का स्वरूप देखता है। रामकथा का श्रवण करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भवसागर से पार पाने के लिए राम नाम ही सर्वोत्तम साधन है। कथा का समापन 15 अप्रैल को होगा। इस अवसर पर मदन शर्मा, पंकज शर्मा, हेमराज, मदन लाल, चमन शर्मा, सुभाष गौतम, बालकिशन शर्मा, संजय कुमार, हरकेश गौतम, मस्त राम, बसंत राम, मिलखी राम, ओमप्रकाश सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
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