डीहर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालु। स्रोत: जागरूक पाठक।
-डीहर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत मोरसिंघी के गांव डीहर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन दिवाकर शुक्ला ने श्रद्धालुओं को सती चरित्र का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने जीवन में धर्म, मर्यादा और आत्मसम्मान के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को किसी भी स्थान पर जाने से पहले यह अवश्य विचार करना चाहिए कि वहां उसका, उसके इष्ट देव या उसके गुरु का सम्मान होगा या नहीं। यदि कहीं अपमान होने की संभावना हो तो उस स्थान पर जाने से बचना ही उचित है, चाहे वह स्थान अपने जन्मदाता पिता का ही घर क्यों न हो। उन्होंने सती चरित्र का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब भगवान शिव ने सती को उनके पिता के घर आयोजित यज्ञ में जाने से मना किया था, तब भी वह अपने पिता के घर चली गईं। वहां यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया गया, जिसे सती सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने यज्ञ की अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को समझाया कि जीवन में स्वाभिमान व सम्मान का विशेष महत्व होता है और व्यक्ति को ऐसे स्थानों से दूर रहना चाहिए जहां अपमान की संभावना हो। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह मनुष्य को जीवन के सत्य से परिचित कराती है। यह कथा धर्म और अधर्म के बीच के अंतर को स्पष्ट करती है व मनुष्य को सत्य, भक्ति एवं सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इससे मन को शांति मिलती है और जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होती है।