श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही भागवत कथा का श्रवण करते हुए श्रद्धालु। स्रोत: जागरूक पाठक।
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में भागवत कथा का तीसरा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर में स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक संदीपन वशिष्ठ ने मनु और शतरूपा की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि हिंदू ग्रंथों में मनु ब्रह्मा के मानस पुत्र है और इन्हें धरती का पहला पुरुष बताया जाता है। उनकी पत्नी शतरूपा भी धरती की पहली स्त्री मानी जाती हैं। मनु और शतरूपा ने घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया। रामायण और रामचरित मानस हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक ग्रंथों में से एक हैं। इसका एक-एक पात्र हमें कुछ न कुछ शिक्षा जरूर देता है। इन्हीं में से एक राजा दशरथ और माता कौशल्या भी हैं, जो रामायण के मुख्य पात्र रहे हैं। इन्हें भगवान राम को अपने पुत्र के रूप में पाने का सौभाग्य वरदान के कारण प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि पौराणिक कथा के अनुसार, स्वयंभू मनु और शतरूपा धरती के पहले पुरुष और स्त्री थे। उन दोनों ने अपना राज्य अपने पुत्र को सौंप दिया और नैमिषारण्य जाकर भगवान वासुदेव का ध्यान करने लगे। दोनों ने भगवान विष्णु को अपने पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। तब स्वयंभू मनु और शतरूपा ने भगवान विष्णु से कहा कि आप हमारे पुत्र बनें हमारी यही इच्छा है। दोनों की इच्छा की पूर्ति करते हुए प्रभु श्री हरि ने वरदान देते हुए कहा कि त्रेता युग में आप दोनों को अयोध्या के महाराजा और महारानी के रूप में जन्म मिलेगा व आपके पुत्र के रूप में मेरा सातवां अवतार अर्थात श्रीराम का जन्म होगा। इसी वरदान के फलस्वरूप अगले जन्म में स्वयंभू मनु राजा दशरथ और उनकी पत्नी शतरूपा माता कौशल्या बनी। वहीं प्रभु श्रीराम ने उन दोनों के पुत्र के रूप में जन्म लिया। कथा के समापन पर भजन कीर्तन का आयोजन हुआ और प्रसाद वितरित किया गया।