व्यवस्थाओं के त्वरित कायाकल्प पर उठे सवाल
लंबे समय से अव्यवस्थाओं से जूझ रहा था घुमारवीं
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के घुमारवीं दौरे ने जहां क्षेत्र को करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं की सौगात दी, वहीं शहर की व्यवस्थाओं में भी अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय से अव्यवस्थाओं से जूझ रहा घुमारवीं मुख्यमंत्री के आगमन से पहले मानो एक ही दिन में चमक उठा।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की सूचना मिलते ही प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई। महीनों से जर्जर हालत में पड़ी सड़कों की मरम्मत रातों-रात कर दी गई। विशेष रूप से सीर खड्ड पुल पर लंबे समय से पड़े गहरे गड्ढे, जो आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे थे, उन्हें एक दिन में भरकर सड़क को दुरुस्त किया गया। नगर परिषद व संबंधित विभागों के कर्मचारियों ने युद्ध स्तर पर सफाई अभियान चलाया, जिससे शहर की गलियां, नालियां और सार्वजनिक स्थल साफ-सुथरे नजर आए। इसके साथ ही बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी स्वयं मौके पर निगरानी करते दिखे। आम दिनों में जिन शिकायतों पर कार्रवाई के लिए लोगों को भटकना पड़ता है, वे मुख्यमंत्री के आगमन से पहले प्राथमिकता में आ गईं। प्रशासन की इस त्वरित सक्रियता को आमजन ने भी स्पष्ट रूप से महसूस किया। हालांकि इस अचानक हुए कायाकल्प के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है। यदि प्रशासन और विभिन्न विभाग मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान दिखाई गई तत्परता, जिम्मेदारी और कार्यकुशलता को आम दिनों में भी अपनाएं, तो शहर की बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है। यह विडंबना ही है कि आम जनता को सुरक्षित सड़कें, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाएं पाने के लिए किसी वीआईपी दौरे का इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय लोग सुरजीत, दुर्गादास, दीपक, अनिल, राकेश, मदनलाल, संदीप कुमार, नीरज कुमार, विक्की और अमित कुमार का कहना है कि विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन महत्वपूर्ण है, लेकिन रोजमर्रा की सुविधाएं सुरक्षित सड़कें, स्वच्छ वातावरण, सुरक्षित यातायात और निर्बाध सेवाएं उतनी ही आवश्यक हैं। यदि शासन-प्रशासन वीआईपी कल्चर में दिखाई देने वाली कार्यशैली को नियमित व्यवस्था का हिस्सा बना ले, तो जनता को स्थायी राहत मिलेगी और प्रदेश का संतुलित विकास संभव हो सकेगा।