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Bilaspur News: अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष उठा भाखड़ा विस्थापित परिवारों का दर्द

Sat, 18 Apr 2026 11:06 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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पुनर्वास, भूमि अधिकार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाया
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भूमिहीन प्रमाण पत्र न मिलने से विस्थापित परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर दौरे पर पहुंचे अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष के सामने भाखड़ा डैम विस्थापित परिवारों की वर्षों पुरानी पीड़ा एक बार फिर सामने आई। आयोग की ओर से अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों की समस्याएं सुनने के लिए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को आमंत्रित किया गया था, जिसमें सभी प्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखने का अवसर दिया गया।
इसी क्रम में भाखड़ा विस्थापित सभा मंडी मानवां के अध्यक्ष रमेश चंद कौंडल ने आयोग के समक्ष विस्थापित परिवारों की समस्याएं विस्तार से रखते हुए पुनर्वास, भूमि अधिकार और सामाजिक स्थिति से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाया। कहा कि वर्ष 1954-55 में भाखड़ा बांध परियोजना के निर्माण के लिए जिले के सैकड़ों गांवों और हजारों परिवारों को अपनी जमीन, घर और आजीविका छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था। उन्होंने बताया कि पुड, दिनदूयुटी, कशनियूर, तबतन, बलोटा, नदोआ, ठठली, बासीयां, कुरीघाट, ज्योरी सहित कई गांव डैम के जलाशय में समा गए। कहा कि देश के विकास के लिए किए गए इस बलिदान के बदले में विस्थापित परिवारों को जो मुआवजा दिया गया, वह बेहद कम था। बताया कि पुनर्वास के तहत मंडी मानवां क्षेत्र में विस्थापित परिवारों को मात्र पांच-पांच बिस्वा भूमि आवास के लिए दी गई, जहां लोगों ने किसी तरह झुंगियां और कच्चे मकान बनाकर जीवन शुरू किया। बाद में प्रशासन द्वारा मकान निर्माण के लिए तीन-तीन हजार रुपये का कर्ज भी दिया गया, लेकिन समय पर भुगतान न होने के कारण कई परिवार डिफाल्टर हो गए और उन पर रिकवरी नोटिस तक पहुंच गए। विस्थापन का सबसे बड़ा असर शिक्षा पर पड़ा। पुराने बिलासपुर शहर के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की किताबें, कलम, स्लेट और शैक्षणिक सामग्री तक नष्ट हो गई, जिससे कई बच्चों को पढ़ाई छोड़कर मजदूरी का रास्ता अपनाना पड़ा।
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कौंडल ने कहा कि आज भी इन परिवारों की आने वाली पीढ़ियां उसी गरीबी और बेरोजगारी के दलदल में फंसी हुई हैं। उन्होंने बताया कि जो पांच बिस्वा भूमि आवास के लिए दी गई थी, उसमें परिवारों के बढ़ने से जमीन अत्यंत कम पड़ गई है और एक ही भूमि पर कई परिवारों का अधिकार हो गया है। ऐसे में कई परिवारों के पास रहने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। आयोग से आग्रह किया कि इन विस्थापित परिवारों को भूमिहीन घोषित किया जाए, क्योंकि वर्तमान में राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम पर नाममात्र भूमि दर्ज है, जिसके कारण उन्हें भूमिहीन प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा है और वे सरकार की योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने आयोग से इस मामले में सकारात्मक हस्तक्षेप की मांग की।
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