बिलासपुर वन मंडल से संबंधित है मामला, शिकायत के बाद की कार्रवाई
-शिकायत में लिखा, बदलाव करते समय हुई है स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के तहत फोरलेन निर्माण कार्य के लिए वन भूमि पर रोड अलाइनमेंट बदलने की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हिमाचल सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। यह मामला बिलासपुर वन मंडल के तहत आता है।
मंत्रालय के शिमला स्थित उप-कार्यालय से जारी पत्र में बताया गया है कि फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने 1 और 8 मई 2025 को मंत्रालय को शिकायत पत्र भेजा था। उन्होंने वन भूमि पर केंद्र सरकार की अनुमति के बिना रोड अलाइनमेंट में बदलाव की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया है। शिकायत के अनुसार, एनएच-21 के किरतपुर से नेरचौक खंड में टू लेन से फोरलेन तक चौड़ाई और मजबूतीकरण के लिए 69.8761 हेक्टेयर वन भूमि को डायवर्ट किया गया है, जबकि पहले यह आंकड़ा 74.78 हेक्टेयर दर्शाया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस बदलाव में पारदर्शिता नहीं बरती गई और इससे स्थानीय पर्यावरण व प्रभावित लोगों के हितों की अनदेखी हुई है। उप-वन महानिरीक्षक (के) राजा राम सिंह द्वारा अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) को भेजे गए पत्र में इस पूरे मामले की जांच कर मंत्रालय को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यह पत्र सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बाद 25 जून को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी किया गया। मंत्रालय ने इस पत्र की प्रतिलिपि राज्य सरकार के नोडल अधिकारी-सह-अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल को भी भेजी है। वहीं शिकायतकर्ता को भी इसकी जानकारी दी गई है।
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समिति के महासचिव मदन लाल ने कहा कि यह मामला फोरलेन निर्माण के लिए दी गई सशर्त मंजूरी और अंतिम मंजूरी से जुड़ा है। जिसमें वन विभाग ने कुछ अहम शर्तों को पूरा करना था। लेकिन फोरलेन तैयार होने के बाद भी उन शर्तों की अनुपालना नहीं हो पाई है। इसी मामले को लेकर समिति वन मंत्रालय पहुंची है। इसके बाद अब यह कार्रवाई हुई है।