सूखा कूड़ा उठाने की सेवा 15 दिन से ठप, बस स्टैंड बना डंपिंग ग्राउंड
न कूड़े की छंटाई के लिए जगह बची है, न ही कूड़ा प्रबंधन के लिए संयंत्र
संजीव शामा
घुमारवीं(बिलासपुर)। स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में सुधार कर खुद की पीठ थपथपाने वाली नगर परिषद घुमारवीं की सफाई व्यवस्था की असली तस्वीर चिंताजनक है। बीते 15 दिनों से नगर परिषद द्वारा लोगों के घरों से सूखा कूड़ा उठाने की सेवा पूरी तरह बंद पड़ी है।
शहर के अधिकांश घरों में सूखे कचरे के ढेर लग चुके हैं, जो अब गलियों और सड़कों तक फैलने लगे हैं। हालात ऐसे हैं कि डंपिंग साइट खुद कूड़ा घर बन चुकी है, जहां कचरे के ढेर लगे हैं। नगर परिषद के पास न तो कूड़े की छंटाई के लिए जगह बची है और न ही कूड़ा प्रबंधन के लिए संयंत्र। मजबूरी में अब कचरा बोरी में भरकर सड़क किनारे ही रखा जा रहा है। बस अड्डा की स्थिति सबसे भयावह हो गई है। यहां कचरे के ढेरों से उठती बदबू के कारण यात्री और दुकानदार खासे परेशान हैं। कई लोग रुमाल बांधकर बस स्टैंड में घुसने को मजबूर हैं, लेकिन नगर परिषद और बस स्टैंड प्रबंधन मौन बना है। बस स्टैंड का बड़ा हिस्सा अब डंपिंग साइट में तब्दील हो चुका है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जब 15 दिन से सूखा कूड़ा नहीं उठाया जा रहा, तो स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम को यह असलियत क्यों नहीं दिखी? नगर परिषद भले ही कागजों में अव्वल हो, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे उलट है। शहरवासी पिछले ढाई दशक से ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक न तो भूमि तय हुई है और न ही कोई स्थायी समाधान सामने आया है। यह स्थिति तब है जब परिषद के पास बजट की भी कमी नहीं है।
कोट
फैक्ट्री नहीं ले रही कूड़ा, इसलिए उठाव रुका : कार्यकारी अधिकारी
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी खेमचंद वर्मा ने कहा कि सूखा कूड़ा सीमेंट फैक्ट्री भेजा जाता है, लेकिन फिलहाल फैक्ट्री कूड़ा नहीं ले रही है, जिस वजह से लोगों के घरों से सूखा कूड़ा नहीं उठाया जा रहा। वहीं बस स्टैंड की गंदगी पर उन्होंने कहा कि प्रबंधन को पहले ही कहा गया था कि गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग करके दें, तभी कूड़ा उठाया जाएगा।
संवाद
नगर परिषद घुमारवीं में लगे कूड़े के ढेर। संवाद