गेहूं के बीज के साथ जबरन दी गई फफूंदनाशक दवाई, एक्सपायरी निकलने पर भड़के किसान
फसलों को नुकसान और पर्यावरण को खतरे की जताई आशंका, जांच कर कार्रवाई की उठाई मांग
अधिकारियों ने दावा किया था फसल बढ़ेगी, लेकिन एक्सपायरी डेट देख किसानों में निराशा
मंगल ठाकुर
बरठीं (बिलासपुर)। बरठीं क्षेत्र में किसानों के बीच उस समय हड़कंप मच गया जब यह खुलासा हुआ कि कृषि विभाग बरठीं द्वारा उन्हें दी गई फफूंदनाशक दवाई एक्सपायर हो चुकी है। किसानों का आरोप है कि विभाग की इस लापरवाही से न केवल उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता था बल्कि फसलों को भी भारी नुकसान हो सकता था। किसानों ने कहा कि यह उनके साथ सीधा धोखा है।
देशराज शर्मा, लेख राम, चमन लाल, राजेश कुमार, रणवीर सिंह और धर्म सिंह ने बताया कि अब तक तो निजी दुकानदारों द्वारा एक्सपायरी दवाइयां बेचने की शिकायतें सुनने में आती थीं, लेकिन यह पहली बार है जब विभाग स्वयं ऐसी दवा किसानों को बांट रहा है। कहा कि फफूंदनाशक यह दवाई गेहूं के बीज के साथ जबरदस्ती दी गई, और इसके लिए विभाग ने किसानों से बाकायदा 21 रुपये शुल्क भी वसूला था। अधिकारियों ने दावा किया कि यह दवाई फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने में सहायक होगी, लेकिन जब किसानों ने घर जाकर पैकिंग पर लिखी तारीख देखी, तो उन्हें ज्ञात हुआ कि दी गई दवा एक्सपायर हो चुकी है। कहा कि एक्सपायरी दवा का उपयोग करने से फसलों की पैदावार बढ़ने के बजाय आधी रह जाएगी। इतना ही नहीं, इससे मिट्टी और पर्यावरण को भी नुकसान हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग ने किसानों की मेहनत को बर्बाद करने का पूरा इंतजाम कर रखा था। किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और किसानों से वसूले गए पैसे वापस लौटाने की मांग की। साथ ही कहा कि भविष्य में किसानों को केवल अच्छी गुणवत्ता की दवाइयां और बीज ही दिए जाएं ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
कोट
फिलहाल इस तरह की कोई शिकायत उनके संज्ञान में नहीं आई है, लेकिन यदि मामला सही पाया गया तो जांच कर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रेम ठाकुर, कृषि उपनिदेशक
संवाद