अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने की मामले की सुनवाई
अदालत ने कहा, शुरुआती जांच में राहत देने से प्रभावित हो सकती है पड़ताल
-4 मार्च को पूर्व प्रधान पर करीब 15 लोगों ने किया था जानलेवा हमला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं में ग्राम पंचायत पट्टा के प्रधान पर हुए हमले के मामले में नामजद आरोपी सुकांत चौहान को अदालत से राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामला अभी जांच के शुरुआती चरण में है और इस समय आरोपी को अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।
मामले में आरोपी ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि वह कानून का पालन करने वाला नागरिक है और उसे झूठा फंसाया गया है। उसने अदालत को भरोसा दिलाया था कि वह जांच में सहयोग करेगा और अदालत की शर्तों का पालन करेगा। अदालत में पेश जवाब में पुलिस की ओर से बताया गया कि चार मार्च को घुमारवीं अस्पताल से फोन पर सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति को मारपीट के बाद उपचार के लिए लाया गया है। सूचना मिलने पर पुलिस टीम अस्पताल पहुंची, जहां घायल रवि पाल का बयान दर्ज किया गया। रवि पाल ग्राम पंचायत पट्टा के प्रधान हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसी दिन शाम के समय वह अपने निजी काम से कसोहल की ओर जा रहा था। रास्ते में पुल के पास कुछ लोग हंगामा कर रहे थे। उसने उन्हें ऐसा करने से मना किया और वहां से चला गया। बाद में शाम करीब सात बजे वह गांव पट्टा में एक दुकान पर घरेलू सामान लेने गया। आरोप है कि उसी दौरान पहले देखे गए लोग अपने साथियों के साथ वहां पहुंच गए। शिकायत के अनुसार एक व्यक्ति के हाथ में गंडासा, जबकि सुकांत चौहान के पास तलवार थी और अन्य के हाथों में डंडे थे। आरोप है कि इन लोगों ने उस पर हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और बचने के लिए दुकान के काउंटर के नीचे छिप गया, लेकिन आरोपियों ने मारपीट जारी रखी, जिससे वह बेहोश हो गया।
पुलिस ने मामले में शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार और वाहन की बरामदगी अभी बाकी है और मामले की जांच जारी है। अदालत ने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता ने अपने बयान में आरोपी सुकांत चौहान का नाम स्पष्ट रूप से लिया है। मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है और अभी कई अहम पहलुओं की जांच बाकी है। ऐसे में यदि इस समय आरोपी को अग्रिम जमानत दी जाती है तो जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। साथ ही गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निपटारे तक सीमित हैं और मामले के अंतिम निर्णय पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।