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क्रस्ना लैब में तीसरे दिन मिल रही टेस्ट रिपोर्ट

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बिलासपुर। जिला अस्पताल बिलासपुर में क्रस्ना लैब साढ़े तीन महीने के बाद भी सेवाएं शुरू नहीं कर पाई है। लैब में शाम 4:00 बजे तक सैंपल तो लिए जा रहे हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट चंडीगढ़ से तीसरे दिन मिलती है। सरकारी लैब में दोपहर 12:30 बजे तक ही टेस्ट की सुविधा मिलती है।
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बिलासपुर अस्पताल में क्रस्ना लैब के लिए अभी फिटिंग का कार्य शुरू हुआ है। इसे करीब एक महीने में पूरा किए जाने की संभावना है। इसके बाद ही लैब में मरीजों को नियमित सेवाएं मिलना शुरू होंगी। जिलेभर से मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन यहां पर दोपहर 12:30 बजे के बाद आपात स्थिति में टेस्ट की सुविधा नहीं मिल पा रही है। आपात स्थिति में मरीजों को लैब के अभाव में नेरचौक मेडिकल कॉलेज, आईजीएमसी शिमला, पीजीआई रेफर किया जाता है। इससे मरीज और तीमारदार दोनों को ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की जेब पर भी इसका असर पड़ता है। पिछले करीब साढ़े तीन माह से अस्पताल में यही सिलसिला चला हुआ है। सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे करती है लेकिन टेस्ट तक की सुविधा भी समय से मुहैया नहीं करवाई जा रही है।
दूरदराज से अस्पताल आने वाले मरीजों को पहले पर्ची की लाइन में खड़ा होना पड़ता है। उसके बाद चिकित्सक की ओपीडी के बाहर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वहीं चिकित्सक जब तक टेस्ट करवाने के लिए भेजते हैं तो 12:30 बजे का समय पूरा हो चुका होता है। इससे मरीज को दूसरे दिन या फिर से अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है। क्रस्ना लैब में सैंपल देने के बाद रुटीन टेस्ट की रिपोर्ट भी तीसरे दिन मिलती है।
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सरकार को कई बार समस्या बता चुके हैं। कंपनी को भी लेटर जारी किए गए हैं ताकि समय से लैब शुरू करें और मरीजों को सुविधा हो। अभी तक लैब सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पाई है।
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-संजीव कुमार, एमएस बिलासपुर
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