प्रशिक्षित स्वयंसेवक बनेंगे पहली राहत की ताकत, हर आपात स्थिति में देंगे त्वरित सहायता
2244 आपदा स्वयंसेवक और 884 सिविल डिफेंस वॉलंटियरों में से चुने जाएंगे दक्ष सदस्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को अधिक प्रभावी, संगठित तथा त्वरित बनाने के लिए नई पहल ‘टीम प्रबल’ की शुरुआत की है। उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष राहुल कुमार ने शनिवार को बचत भवन से इस महत्वाकांक्षी पहल का शुभारंभ किया। प्रबल (प्रॉम्प्ट रेस्क्यू एक्शन फ्रॉम बिलासपुर फॉर एड एंड लाइफ सेविंग) का उद्देश्य किसी भी आपदा अथवा आपातकालीन स्थिति में शीघ्र राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना है।
उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि इस पहल के माध्यम से जिले में पहले से प्रशिक्षित आपदा स्वयंसेवकों और सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को एक साझा मंच पर लाकर उनकी क्षमताओं का बेहतर उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की युवा स्वयंसेवक टास्क फोर्स योजना के तहत जिला की सभी ग्राम पंचायतों से चयनित 2244 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रत्येक पंचायत से 15 स्वयंसेवकों को खोज एवं बचाव, प्राथमिक उपचार तथा अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे आपदा के समय प्रथम प्रतिक्रिया दल के रूप में कार्य कर सकें।
उन्होंने बताया कि गृह रक्षक एवं नागरिक सुरक्षा विभाग द्वारा जिले में 884 सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को भी विभिन्न राहत एवं बचाव गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये स्वयंसेवक आपात परिस्थितियों में प्रशासन और आम जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाएंगे। उपायुक्त ने कहा कि ‘टीम प्रबल’ के लिए आपदा और सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों में से सक्रिय, दक्ष और समर्पित सदस्यों का चयन किया जाएगा। यह टीम प्राकृतिक आपदाओं, सड़क दुर्घटनाओं, अग्निकांड, भूस्खलन, बाढ़ तथा अन्य आपात स्थितियों में त्वरित सहायता और जीवन रक्षक कार्यों के लिए हर समय तैयार रहेगी। टीम के सदस्यों को समय-समय पर उन्नत प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों से और अधिक दक्ष बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की भागीदारी से आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जन-जागरूकता और राहत-बचाव कार्यों में उल्लेखनीय सुधार आएगा। टीम प्रबल न केवल जिले की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि सामुदायिक सहभागिता आधारित आपदा प्रबंधन का एक अनुकरणीय मॉडल भी स्थापित करेगी।