बिलासपुर में करीब 800 टीबी मरीज, अस्पताल नहीं पहुंचने वालों की तलाश में जुटा स्वास्थ्य विभाग
एक महीने से अधिक खांसी, वजन घटना, रात को पसीना और लगातार बुखार टीबी के संभावित लक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। टीबी के मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग अब गांवों में दोबारा से जांच अभियान चलाएगा। जिले के 244 गांवों को टीबी के लिहाज से हाई रिस्क श्रेणी में चिह्नित किया गया है। इन सभी गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें एक बार जांच शिविर लगा चुकी हैं। अब इन गांवों में दोबारा शिविर लगाकर लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। जिले में अब तक करीब 800 टीबी के मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग का विशेष जोर ऐसे लोगों की पहचान पर है, जिनमें टीबी के लक्षण हैं, लेकिन वे जांच या इलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। इसके लिए स्वास्थ्य टीमें हाई रिस्क गांवों में जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। गांवों में लगाए जा रहे शिविरों में लोगों का एक्सरे करने के साथ ही हीमोग्लोबिन और रक्तचाप की जांच भी की जा रही है। एक्सरे में किसी तरह की असामान्यता मिलने पर संबंधित व्यक्ति को आगे की जांच के लिए चिह्नित किया जाता है। टीबी से मिलते-जुलते लक्षण वाले लोगों की भी जांच कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, लंबे समय तक खांसी या बलगम की शिकायत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एक महीने से अधिक समय तक खांसी रहने, बिना किसी स्पष्ट कारण वजन कम होने, कमजोरी, रात में पसीना आने और लगातार बुखार रहने पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर टीबी की पुष्टि नहीं होती। बीमारी की पुष्टि के लिए जरूरी चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।
संदिग्ध मरीजों के लिए बलगम की जांच
शिविर में एक्स-रे के दौरान संदिग्ध मरीज मिलने पर उनकी आगे की जांच कराई जाती है। जरूरत पड़ने पर बलगम की जांच भी कराई जाती है, जो अस्पताल में होती है। शिविरों के माध्यम से सामने आने वाले टीबी मरीजों को जिले के कुल मरीजों की संख्या में शामिल किया जाता है।
चारों ब्लॉकों में चल रहा अभियान
हाई रिस्क के तौर पर चिह्नित 244 गांव किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। ये जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में फैले हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग चारों ब्लॉकों में अभियान चला रहा है। सभी चिह्नित गांवों में पहली बार शिविर लगाए जाने के बाद अब दोबारा स्क्रीनिंग की जाएगी। इस दौरान टीबी के संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें आगे की जांच के लिए भेजा जाएगा।
कोट
जिले के 244 हाई रिस्क गांवों में एक-एक बार शिविर लगाए जा चुके हैं। अब इन गांवों में दोबारा शिविर लगाए जाएंगे। जिले में टीबी के करीब 800 मामले हैं। गांवों में लगाए जा रहे शिविरों में एक्सरे किया जा रहा है और संदिग्ध मरीजों की आगे की जांच करवाई जा रही है। बलगम की जांच अस्पताल में होती है। टीबी की पहचान के लिए अभियान लगातार चल रहा है और चारों ब्लॉकों में समान रूप से काम किया जा रहा है।
- डॉ. शशि दत्त शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी