समोह स्कूल में युवाओं को बचाने की मुहिम
स्वास्थ्य विभाग ने बताया नशा क्यों है समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के उद्देश्य से समोह स्कूल में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसकी प्रधानाचार्या सरिता धीमान ने अध्यक्षता की।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी दीप कुमार और स्वास्थ्य शिक्षक कमल कुमार ने विद्यार्थियों से कहा कि मादक द्रव्यों का सेवन व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन को बर्बाद कर देता है। भारत सरकार द्वारा 15 अगस्त 2020 से नशा मुक्त भारत अभियान शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखकर एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज का निर्माण करना है। देश में वर्ष 2022 के दौरान लगभग 1,15,000 से अधिक ड्रग्स के मामले दर्ज किए गए। केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में समस्या गंभीर रूप ले चुकी है, जबकि हिमाचल प्रदेश में भी सिंथेटिक ड्रग्स (चिट्टा) के मामले बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इंजेक्शन से नशा लेने की प्रवृत्ति से एचआईवी संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि नशे के कारण गले का कैंसर, हृदय रोग,ब्रेन स्ट्रोक, शुगर,उच्च रक्तचाप, सड़क दुर्घटनाएं,आत्महत्या और हिंसा की घटनाएं बढ़ती हैं। किसी भी नशे की लत व्यक्ति को धीरे-धीरे निर्भर बना देती है, जिससे उसका भविष्य और परिवार दोनों प्रभावित होते हैं।
स्वास्थ्य शिक्षक कमल कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 तक तंबाकू उपयोग को 10 प्रतिशत से कम और 2030 तक 5 प्रतिशत से कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। शिक्षा संस्थानों और पंचायतों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। कार्यक्रम में भाषण एवं चार्ट प्रतियोगिता हुई। भाषण में यशवी शर्मा ने प्रथम, तेजस शर्मा ने द्वितीय, अभिषेक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। चार्ट प्रतियोगिता में आयुष जमवाल प्रथम, हर्षित द्वितीय और सृष्टि शर्मा तृतीय स्थान पर रहे। सभी विजेताओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुरस्कृत किया गया। अंत में 120 विद्यार्थियों और अध्यापकों ने नशा मुक्त भारत की शपथ ली।