कांग्रेस जनविरोधी, पहले परीक्षा फिर 2 साल बाद भी नौकरी की नहीं कोई गारंटी
भाजपा जिलाध्यक्ष बोले, हिम केयर और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से भी रहेंगे वंचित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाजपा के जिला अध्यक्ष कृष्ण लाल चंदेल ने जॉब ट्रेनी पॉलिसी को लेकर कहा कि यह नीति प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को ठगने का नया जाल है। सरकार के लिए एक साल का जीवनदान मात्र। चंदेल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अब तक जो भी फैसले लिए, वे जनविरोधी रहे हैं। युवाओं को स्थायी नौकरी का सपना दिखाकर अब दो-दो परीक्षाओं और अस्थायी व्यवस्था के फेर में उलझाया जा रहा है।
चंदेल ने कहा कि यह भर्ती प्रक्रिया प्रदेश के 12 लाख युवाओं के साथ एक बड़ा धोखा है। पहले युवाओं को परीक्षा देकर चयनित होना पड़ेगा, फिर दो साल तक ट्रेनिंग के नाम पर कार्य लिया जाएगा, लेकिन उसके बाद भी पक्की नौकरी की कोई गारंटी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं से स्थायी कर्मचारियों की तरह काम तो लेगी, लेकिन न उन्हें मेडिकल बिल का भुगतान मिलेगा और न ही हिम केयर और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ। चंदेल ने कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के उस वीडियो का जिक्र किया जिसमें उन्होंने सत्ता में आने पर पहली ही कैबिनेट में 1 लाख युवाओं को स्थायी नौकरी देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी, भूपेश बघेल, राजीव शुक्ला, सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुकेश अग्निहोत्री ने गली-गली जाकर युवाओं को पक्की नौकरी का भरोसा दिलाया था। उन्होंने कहा कि वादा किया गया था कि 63 हजार खाली पदों के अलावा 37 हजार नए पदों का सृजन कर 58 साल तक की पक्की नौकरियां दी जाएंगी, लेकिन अब केवल भ्रम फैलाया जा रहा है। कहा कि कांग्रेस सरकार ने नौकरी देने के नाम पर केवल अपने करीबियों को ही लाभ पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मित्र, वन मित्र और पशु मित्र जैसे शब्द हिमाचल में आम हो गए हैं। दूसरी ओर लाखों युवा लाइब्रेरी में बैठकर परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन या तो परीक्षाएं रद्द हो जाती हैं या फिर परिणाम अटक जाते हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने नौकरी देने वाले संस्थानों को बंद कर दिया और एक ही अधिसूचना से प्रदेश के 1.50 लाख पद समाप्त कर दिए। उन्होंने कहा कि सरकार न आउटसोर्स पॉलिसी बना पाई, न ही कोई वैकल्पिक रोजगार योजना। कहा कि इस पॉलिसी को लागू करने के लिए सरकार के पास कोई स्पष्ट फार्मूला नहीं है। यह केवल युवाओं के साथ एक मजाक है। न नियुक्ति प्रक्रिया स्पष्ट है, न ही लाभों की स्थिति। सरकार केवल शब्दों का खेल खेल रही है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है।