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रेफरी को बताए खो-खो खेल के नियम

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घुमारवीं(बिलासपुर)। खो-खो संघ जिला बिलासपुर की ओर से घुमारवीं में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में लगभग 70 शारीरिक शिक्षकों व खेल प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यशाला का शुभारंभ घुमारवीं के व्यवसायी सतीश सोनी ने किया और समापन अवसर पर संघ के जिलाध्यक्ष सरोज शर्मा मुख्यातिथि और डॉ. केडी लखनपाल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य खेल बारीकियों का जानना और अंपायरिंग स्तर में सुधार लाना था।
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कार्यशाला सत्र के दौरान पंजाब से पहुंचे कोच दीपक कुमार ने खेल की बारीकियों के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि खेल तभी आगे बढ़ सकता है जब उसकी पूरी तरह से जानकारी हो। खो-खो खेल एक भारतीय मैदानी खेल है। यह एक अनूठा स्वदेशी खेल है, जो युवाओं में स्वस्थ संघर्षशील जोश भरने वाला है। खो-खो मैदानी खेलों के सबसे प्राचीनतम रूपों में से एक है। यह गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि प्रदेशों में अधिक खेला जाता है, किंतु भारत के अन्य प्रदेशों में भी इसका प्रचार अब बढ़ रहा है।
उन्होंने खेल के नियमों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अंपायर लॉबी से बाहर खड़ा होगा और खेल की देख रेख करेगा। वहीं रेफरी अंपायरों की उनके कर्तव्य पालन में सहायता करता है। वह खेल में बाधा पहुंचाने वाले व नियमों का उल्लंघन करने वाले खिलाड़ियों को दंड दे सकता है। संघ के सचिव पवन कुमार ने अपने सत्र के दौरान कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य खेल बारीकियों का जानना व अंपायरिंग में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि खो-खो खेल में बेहतर परिणाम लाने के लिए अंपायरिंग स्तर में सुधार होना बेहद जरूरी है। यदि अंपायरिंग की वजह से खेल में कुछ गलत निर्णय हो तो इससे खिलाड़ियों का मनोबल टूट जाता है, जोकि खेल पर बुरा प्रभाव डालता है।
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इस मौके पर संघ के समन्वयक श्याम सिंह ठाकुर सहित अवतार सिंह, शारीरिक शिक्षक हरीश कुमार शर्मा, सुरजीत सिंह अन्य मौजूद रहे।
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