बिलासपुर। ऐतिहासिक मंदिरों के पुनर्स्थापन और पर्यटन योजना के तहत गोबिंद सागर झील के किनारे प्रस्तावित घाटों के लिए मिट्टी के सैंपल लेने का काम शुरू हो गया है। सॉयल टेस्टिंग कंपनी के कर्मचारियों ने लुहणू घाट पर डेरा डाल लिया है। घाट पर बोरिंग मशीन से मिट्टी के सैंपल लिए जा रहे हैं। मिट्टी के सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजे जाएंगे।
1500 करोड़ रुपये की इस योजना के तहत नाले के नौण और लुहणू में हरिद्वार की तर्ज कर घाटों का निर्माण किया जाएगा। सॉयल टेस्टिंग कंपनी के कर्मचारी इन दिनों लुहणू मेला मैदान में बोरिंग मशीन लगाई है। लुहणू मैदान के आस-पास की जगहों से मिट्टी के सैंपल लिए जाएंगे। इससे पहले सांडू मैदान स्थित ऐतिहासिक मंदिरों के आसपास और झील के अंदर से भी मिट्टी के सैंपल लिए गए हैं। मिट्टी के सैंपल को दिल्ली में आईजीसी कंपनी की लैब में जांच के लिए भेजा जा रहा है।
सैंपल की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा निर्माण कार्य के दौरान लीव के लिए कितनी गहराई तक खुदाई करनी होगी। बता दें कि योजना के तहत पर्यटन स्थल को विकसित करने के लिए सांढू मैदान में कृत्रिम टापू बनाए जाना प्रस्तावित है। इन टापुओं को केवल पुल के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इन्हीं टापुओं पर जलमग्न हो चुके मंदिरों को लिफ्ट कर लाया जाएगा। साथ ही कृत्रिम झील के बैराज का निर्माण भी किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को तीन चरणों में कार्यान्वित करने का प्रस्ताव है।
इस तरह होगा काम
पहले चरण में नाले के नौण के पास के जलमग्न तीन मुख्य मंदिरों को पुनर्स्थापित करने का प्रस्ताव है। दूसरे चरण में सांढू के मैदान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। तीसरे चरण में मंडी भराड़ी के पास बैराज बनाकर मंदिरों के आस-पास एक जलाशय बनाया जाएगा। इसमें रिवर फ्रंट और वॉकवेज इत्यादि विकसित किए जाएंगे। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद बिलासपुर पर्यटन की दृष्टि से तेजी से विकसित होगा और पूरे जिले का केंद्र बिंदु सांढू मैदान होगा।