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विश्व कल्याण के लिए सामाजिक समरसता जरूरी : प्रमोद

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गायत्री मंदिर बिलासपुर में किया गया संगोष्ठी का आयोजन
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कहा, धर्म के 10 लक्षण भारत के ही संतों ने समाज में लागू कराए


संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गायत्री मंदिर बिलासपुर में ठाकुर रामसिंह स्मृति न्यास एवं सामाजिक समरसता मंच हिमाचल प्रांत के तत्वावधान में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय सामाजिक समरसता में संतों की भूमिका रहा। इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में उत्तर क्षेत्र सामाजिक समरसता संयोजक प्रमोद ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि विश्व कल्याण के लिए सामाजिक समरसता जरूरी है।
प्रमोद ने कहा कि प्राचीन काल से सारी प्रजा धर्मानुसार चलने वाली होगी, शास्त्र सम्मत होगी, ऐसे नियम संतों ने निश्चित किए थे। धर्म के 10 लक्षण भारत के ही संतों ने समाज में लागू कराए। इनका ही पालन करते हुए समाज आगे बढ़ा। संत ही राजा के लिए नियम बनाने वाले, राजा को दंड देने वाले हुए। ये ही संत धर्माचार्य कहलाए। पूरे भारत के संतों ने हमेशा यहां के लोगों को समरसता के साथ ही लेकर चले। 12वीं शताब्दी में भक्ति आंदोलन में बहुत बड़ा आंदोलन शुरू हुआ।
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उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के बहुत बड़े संत रामानुजाचार्य का उदाहरण सबके सामने है। इसी कड़ी में माधवाचार्य, संत तुकाराम, संत रविदास जैसे संत हुए। इन्हीं संतों ने उद्घोष किया था कि धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो। जब तक सामाजिक भेदभाव होगा तब तक धर्म की जय नहीं हो सकती। जब तक धर्म की जय नहीं होगी तब तक विश्व का कल्याण नहीं होगा। विश्व के कल्याण के लिए भारत में सामाजिक समरसता होना अत्यंत आवश्यक है। संतों को इस कार्य के लिए दोबारा अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
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संगोष्ठी में स्वामी राजेंद्र गिरी ने भी संबोधित किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता समरसता मंच बिलासपुर के अध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर ने की। इस अवसर पर कई साधु-संत भी उपस्थित रहे। इनके अलावा संगोष्ठी में अपेक्षित लोगों में लगभग 120 लोगों ने भाग लिया।
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