मंदरीघाट में श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर शोभायात्रा निकालते लोग। संवाद
कथावाचक पंडित जीवानंद शैल ने पहले दिन सुनाया भागवत महात्म्य
बोले- श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने मात्र से कट जाते हैं जन्म-जन्मांतर के पाप
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मंदरी घाट में वीरवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। सुबह महिलाओं और युवतियों ने सिर पर कलश धारण कर भक्ति गीतों के साथ यात्रा निकाली, जिससे पूरा वातावरण धार्मिक रंग में रंग गया। यात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए कथा स्थल पर पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना की गई।
पहले दिन कथावाचक पंडित जीवानंद शैल ने भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और यह मनुष्य को भवसागर से पार कराने वाली मरणोत्तर मुक्ति का साधन है। उन्होंने कहा कि वेदव्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्रों से परिपूर्ण इस महापुराण की रचना मानव कल्याण के लिए की थी।
कथावाचक ने धुंधकारी और गोकर्ण प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार गोकर्ण ने भागवत कथा के माध्यम से अपने भाई धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाई। यह प्रसंग भागवत कथा की महिमा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु भक्ति और एकाग्रता के साथ कथा का श्रवण करते हैं, उनके जीवन में ज्ञान और भक्ति का संचार होता है,उन्हें आध्यात्मिक शांति का अनुभव प्राप्त होता है। आयोजकों ने बताया कि कथा सप्ताह भर चलेगी, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया जाएगा। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए और कथामृत का लाभ उठाया।