बिलासपुर के कोटलु ब्राह्मणा में चल रही शिव महापुराण कथा सुनाते लोग। स्रोत : स्वयं
-गणपति ने परिक्रमा कर यह सिद्ध किया कि उनके लिए माता-पिता ही संपूर्ण ब्रह्मांड
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं(बिलासपुर)। शिव शक्ति मंदिर कोटलु ब्राह्मणा में चल रही शिव महापुराण कथा के दौरान कथा वाचक पंडित मदन लाल दुर्वासा ने शिव-पार्वती विवाह, उनके पुत्रों के जन्म और गणेश की बुद्धिमत्ता की कथा सुनाई।
उन्होंने कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव ने अपनी पहली पत्नी सती की मृत्यु के बाद पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। पार्वती, जो हिमालय राज की पुत्री थीं, भगवान शिव की घोर तपस्या कर उन्हें पति रूप में प्राप्त करने में सफल रहीं। विवाह के बाद भगवान शिव और माता पार्वती ने कैलाश पर्वत को अपना निवास बनाया। भगवान शिव और पार्वती के दो पुत्र कार्तिकेय और गणेश हुए। कार्तिकेय शिव के पराक्रमी पुत्र माने जाते हैं, जबकि गणेश अपनी बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध हुए। कथा में गणेश की चतुराई का उल्लेख करते हुए बताया गया कि एक दिन भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों को पृथ्वी की परिक्रमा करने की प्रतियोगिता दी। कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने चले गए, जबकि गणेश ने अपने माता-पिता की ही परिक्रमा कर यह सिद्ध किया कि उनके लिए माता-पिता ही संपूर्ण ब्रह्मांड हैं। उनकी इस बुद्धिमानी से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें सबसे बड़ा और पूजनीय पुत्र घोषित किया। इस कथा का श्रद्धालुओं ने भाव विभोर होकर सुना।