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Bilaspur News: जिले के सात वीर सपूतों ने कारगिल युद्ध में पाई थी शहादत

Fri, 25 Jul 2025 11:42 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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नायक अश्वनी कुमार
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कारगिल विजय दिवस विशेष
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वीर जवानों ने दुश्मनों को धूल चटाकर लिखी थी विजय गाथा
कारगिल की चोटियों को फतह करने में बिलासपुर के सपूत रहे थे आगे

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर/झंडूता(बिलासपुर) कारगिल युद्ध में बिलासपुर के वीर जवानों का विशेष योगदान रहा है। युद्ध में बिलासपुर के सात वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर विजय गाथा लिखी थी। बिलासपुर के इन वीर जवानों ने अपने बुलंद हौसलों से दुश्मनों को धूल चटाई थी। सात वीर जवानों में वीर चक्र विजेता हवलदार उधम सिंह, नायक मंगल सिंह, राइफलमैन विजय पाल, हवलदार राजकुमार, नायक अश्वनी कुमार, हवलदार प्यार सिंह और नायक मस्तराम ने अपने प्राणों की आहुति देकर कारगिल युद्ध में विजय दिलाई थी। इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य एवं बलिदान की उस सर्वोच्च परंपरा का निर्वाह किया, जिसकी सौगंध हर सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है। 14 मई 1999 को शुरू हुआ कारगिल युद्ध 26 जुलाई 1999 तक चला था। 26 जुलाई को भारत के वीर जवानों ने इस युद्ध पर विजय हासिल की थी। भारत के 527 जवानों ने शहादत का चोला पहना था और 1300 से ज्यादा घायल हुए थे। इस युद्ध में शहीद हुए बिलासपुर के जवान आखिरी सांस तक दुश्मनों से लड़े थे और ऊंची-ऊंची चोटियों पर कब्जा हासिल करने में अहम भूमिका निभाई थी।
घुमारवीं की ग्राम पट्टा पंचायत के शासन गांव के विजय पाल जब शहीद हुए थे तो उनकी आयु 26 वर्ष थी। वे अपने पीछे पत्नी, माता-पिता दो बड़े भाई, एक छोटी बहन को छोड़ गए थे। बड़े भाई आर्मी से सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं मंझले भाई शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। विजय पाल के पिता मनसा राम वन विभाग से सेवानिवृत्त हैं। माता रुक्मिणी देवी गृहिणी हैं। छात्रा स्कूल घुमारवीं का नाम शहीद विजय पाल के नाम पर रखा गया है। पिछड़ा क्षेत्र की कोटधार की कोसरिया पंचायत के 24 वर्षीय वीर जवान नायक मंगल सिंह ने अपने प्राणों की आहुति देकर कारगिल युद्ध में विजय दिलाई थी। उनके घर तक सड़क का निर्माण करवाने को कहा था जो पूरा कर दिया। कारगिल युद्ध में शहीद हुए झंडूता के सेना मेडल नायक शहीद अश्वनी कुमार के नाम बरठीं में सरकार ने पेट्रोल पंप आवंटित किया है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय झंडूता और बस स्टैंड से वाया कोर्ट रोड विकास खंड कार्यालय से एसडीएम कार्यालय के मुख्यालय आनंदघाट तक सड़क का नामकरण शहीद के नाम हुआ है।
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शहीद नायक मस्त राम देश सेवा के जज्बे को लेकर सात डोगरा यूनिट में भर्ती हुए थे। जब मस्त राम ने शहादत पाई, उस वक्त उनके दो बेटे मदन और राजी 16 और 11 वर्ष के थे। बेटी सपना महज 8 वर्ष की थी। मोरसिंघी के गांव मसधान के राजकुमार वशिष्ठ बचपन से ही होनहार थे। वे पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। उन्होंने दसवीं तक की शिक्षा मोरसिंघी विद्यालय से की। आगे की पढ़ाई घुमारवीं से स्कूल से की थी। 1985 में वह भारतीय सेना में भर्ती हुए। कारगिल लड़ाई के दौरान उनकी पोस्टिंग बटालिक सेक्टर में थी। 11 जुलाई 1999 को बटालिक सेक्टर में वह शहीद हुए थे। बैहना ब्राह्मणा पंचायत के खतेहड़ के गांव के हवलदार प्यार सिंह कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हो गए थे। वे वर्ष 1980 में जैक राइफल में भर्ती हुए थे। हवलदार प्यार सिंह के दो बेटे और एक बेटी की शादी हो गई है। सरकार की ओर से बेटे को नौकरी और खतेहड़ स्कूल का नामकरण किया गया है। कारगिल युद्ध में शहीद हुए ऊधम सिंह चैहड़ी गांव के थे। उनका एक छोटा भाई और पांच छोटी बहनें हैं। सभी की शादी हो चुकी है। परिजनों को गर्व है कि ऊधम सिंह ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

नायक अश्वनी कुमार

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