बिलासपुर। कोरोना काल में करीब सात माह बाद सोमवार से प्रदेश में स्कूल और कॉलेज खुल गए हैं। पहले दिए स्कूल, कॉलेज पहुंचे विद्यार्थियों में पढ़ाई को लेकर काफी उत्साह दिखा। स्कूलों में नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं शुरू गईं। वहीं कॉलेजों में भी नियमित पढ़ाई शुरू हो गई है। अब बोर्ड कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों की चिंता भी कम हुई है। सोमवार को शिक्षण संस्थान खुलने के बाद पहले दिन जहां स्कूलों में अध्यापक बच्चों को कोरोना नियमों के पालन का पाठ पढ़ाते नजर आए, वहीं बिलासपुर कॉलेज परिसर में छात्राएं समूहों में खड़ी नजर आईं। वहीं जिला के स्कूलों में पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या 46 फीसदी रही।
कोरोना महामारी के चलते सभी क्षेत्रों प्रभावित हुए हैं। वहीं बोर्ड कक्षाओं में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर इसका खासा असर पड़ा है। उसी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने स्कूल खोलने का फैसला लिया। राजकीय व निजी स्कूलों नौवीं से 12वीं कक्षा की रेगुलर पढ़ाई शुरू हो गई। लंबे दौर तक पाठशालाओं के बंद रहने के उपरांत बच्चों में पढ़ाई को लेकर काफी उत्साह दिखा, वहीं अध्यापक भी उत्साहित दिखे। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए गए थे। जिला बिलासपुर के सभी स्कूलों में सैनिटाइजेशन की सुविधा से लेकर, मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा गया। कई अभिभावकों में बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभी भी डर बना हुआ है।
बरठीं अल्फा पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पहुंचे सभी बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई व पाठशाला को सैनिटाइज किया गया।
बिलासपुर डिग्री कॉलेज में 450 बच्चे उपस्थित रहे। सभी बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग व सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया को पूरा करके उनकी कक्षाओं में भेजा गया। वहीं कॉलेज के प्रचार्य राम कृष्ण ने बताया कि पहले दिन बच्चों की सिर्फ काउंसलिंग की गई व उन्हें कोविड-19 की गाइडलाइंस के साथ कॉलेज के नियमों के बारे में बताया गया।
उच्च शिक्षा उपनिदेशक राजकुमार ने कहा कि स्कूलों में बच्चों की 46 प्रतिशत उपस्थिति रही। जो बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे, उनको ऑनलाइन गृह कार्य भेजा गया। सोमवार को शिक्षा मंत्री ने सभी शिक्षा निदेशकों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग पर बात भी की। पहले दिन विद्यार्थियों की काउंसलिंग कर ली गई है। मंगलवार से अभिभावकों के सहमति पत्र के बिना विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।