बिलासपुर। जल जीवन मिशन के अंतर्गत प्रदेश में बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है। पूरे प्रदेश में योजना के तहत पानी की पाइपें बिछाई जा रही हैं। लोगों को पेयजल कनेक्शन भी दिए जा रहे हैं, लेकिन पानी के नई योजनाओं का कोई निर्माण नहीं किया गया। पुरानी योजनाओं से ही लोगों को पानी के कनेक्शन देकर खाना पूर्ति की जा रही है।
यह आरोप शनिवार को श्री नयना देवी के विधायक और पूर्व कांग्रेस मंत्री रामलाल ठाकुर ने प्रदेश सरकार के जल शक्ति विभाग पर लगाए हैं। ठाकुर ने कहा कि जल जीवन मिशन के लिए भारत सरकार ने हिमाचल को 3200 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस योजना में 90 प्रतिशत केंद्र सरकार देगी और 10 प्रतिशत प्रदेश सरकार के खर्च होंगे, लेकिन इस योजना में बड़े तौर पर गोलमाल किया गया है। रामलाल ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के जल शक्ति विभाग में सभी कार्य सिर्फ दो कंपनियों को दिए जा रहे हैं। इनमें एक और कंपनी शमिल है जो इन दोनों की सिस्टर कंसर्न कंपनी भी शमिल है। जो इन दोनों की ही सहयोगी है।
उन्होंने सीएम और आईपीएच मंत्री से पूछा कि सरकार बताए कि योजना के तहत सिर्फ नल ही लगाने हैं या उनमें लोगों को पानी भी पहुंचाना है? जबकि पीएम मोदी ने खुद कहा था कि साल 2030 तक पानी के अधिकतर स्त्रोत सूख जाएंगे तो ऐसे में पुरानी पेयजल योजनाओं से नए कनेक्शनों की सप्लाई देना कहां तक सही है?
रामलाल ठाकुर ने कहा कि जल शक्ति विभाग प्रदेश के सिर्फ दो हल्कों में लगभग 100 करोड़ की लागत से रेस्ट हाउस बना रही है। जबकि प्रदेश को रेस्ट हाउसों की आवश्यकता नहीं है। कहा कि इस पैसे का सदुपयोग विभाग को नई योजनाएं बनाने में करना चाहिए। ताकि लोगों की पेयजल की समस्या खत्म हो सके।
एम्स के लिए 47 करोड़ की पेयजल योजना मंजूर
एम्स के लिए विभाग ने 47 करोड़ की पेयजल योजना को मंजूरी दी है। जबकि इस योजना के लिए कोलबांध से पानी उठाया जाना है। इस पर सारा खर्च करीब 24 से 27 करोड़ के बीच रहेगा। लेकिन इसमें भी धांधली बरती जा रही है।