घुमारवीं (बिलासपुर)। जिला परिषद सदस्य विभिन्न मदों से हासिल धनराशि को खर्च नहीं कर पाए हैं। पंचायतीराज चुनाव से ठीक पहले हुए इस खुलासे से घुमारवीं ब्लॉक में ग्रामीण विकास विभाग की पोल खुल गई है। करीब तीन साल में विकास कार्यों पर धनराशि खर्च करने का आंकड़ा 40 प्रतिशत को भी पार नहीं कर पाया है, जबकि अन्य राशि का इस्तेमाल जिन विकास कार्यों में होना था वे या तो पूरे नहीं हो पाए या फिर शुरू ही नहीं हो सके हैं। घुमारवीं उपमंडल में जिला परिषद के चार वार्ड हैं। जिनमें कोठी, पट्टा, डंगार और हटबाड़ शामिल हैं।
इन चारों वार्डों में वर्ष 2017-18 में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 29 लाख 57 हजार 950 राशि का अनुदान हासिल हुआ। जिसमें से 11 लाख 31 हजार 500 रुपये की धनराशि विकास कार्यों पर खर्च हुई, जबकि 18 लाख 26 हजार 450 रुपये जो कुल राशि का 38.25 प्रतिशत था, खर्च नहीं हो पाया। 2018-19 में 74 लाख 46 हजार 450 रुपये की कुल धनराशि प्राप्त हुई जबकि 31 लाख 87 हजार 900 रुपये की राशि खर्च नहीं हो पाई। इस साल बकाया राशि 42 लाख 58 हजार 550 रुपये रही, जो कुल राशि का 42.81 प्रतिशत था। 2019-20 में अनुदान 73 लाख 28 हजार 550, खर्च 28 लाख 80 हजार 906 और बकाया राशि, जो 44 लाख 47 हजार 644 रही जो कुल राशि का 39.41 प्रतिशत था। चारों जिला परिषद वार्ड में हालात का अंदाजा जारी हुई धनराशि और उसमें से खर्च की गई कुल धनराशि से लगाया जा सकता है। धनराशि खर्च न होने से कई विकास कार्य अधूरे पड़े हैं।
सबको बराबर मिलती है राशि : चौधरी
खंड विकास अधिकारी घुमारवीं जीत राम चौधरी का कहना है कि ब्लॉक में जिला पार्षद के चार वार्ड हैं। जिन्हें सभी एक समान दृष्टि से देखा गया है। किसी भी पार्षद के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है। सरकार से विकास कार्यों को करवाने के लिए भरपूर पैसा आता है, लेकिन धरातल पर यह पैसा चुने हुए जन प्रतिनिधियों को ही खर्च करना होता है ।