दो बीघा जमीन के एनएचएआई के नाम होने वाले दोनों इंतकाल खारिज
धराड़सानी में भूमि अधिग्रहण के राजस्व रिकॉर्ड की जांच में सामने आईं कई विसंगतियां
39 बिंदुओं की शिकायत पर पटवारी ने सौंपी रिपोर्ट
सरोज पाठक
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के भूमि अधिग्रहण से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में कई विसंगतियां सामने आई हैं। झंडूता तहसील के मौजा धराड़सानी में कहीं फोरलेन सड़क मौजूद है, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में जमीन निजी मालिकों के नाम दर्ज है। दो बीघा जमीन के एनएचएआई के नाम होने वाले दोनों इंतकाल खारिज हो गए, जबकि अन्य जमीन के मामलों में भी अधिग्रहण, बंटवारे और सड़क की माप को लेकर सवाल उठे हैं। 39 बिंदुओं की शिकायत पर तैयार जांच रिपोर्ट में इन विसंगतियों का उल्लेख है। इससे भूमि अधिग्रहण के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति के बीच अंतर सामने आया है।
संबंधित पटवारी ने रिपोर्ट आगामी कार्रवाई के लिए तहसीलदार को सौंपी है। दस्तावेज पर डिस्पैच नंबर 280 और तहसील कार्यालय की डायरी संख्या 2276 दर्ज है। रिपोर्ट की तारीख 7 अक्तूबर 2026 है। इसमें इंतकाल, बंटवारे, निशानदेही और सड़क की माप से संबंधित बिंदुओं का विवरण दिया गया है। खसरा नंबर 562/493/201/4 की दो बीघा जमीन के मामले में एनएचएआई के नाम दर्ज होने वाले दोनों इंतकाल खारिज हो गए। राजस्व रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी के अनुसार, जमीन अब भी मूल मालिक के नाम दर्ज है। रिपोर्ट में दोनों इंतकाल खारिज होने के कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। यह भी रिपोर्ट से स्पष्ट नहीं होता कि इस जमीन का मुआवजा वास्तव में दिया गया था या नहीं। ऐसे में इंतकाल खारिज होने और जमीन का रिकॉर्ड निजी मालिक के नाम बने रहने के कारणों की जांच जरूरी है। खसरा नंबर 562/493/201 की जमाबंदी वर्ष 2011-12 में कुल 10 बीघा जमीन पर तीन हिस्सेदार दर्ज थे। बाद में एक हिस्सेदार ने अपना हिस्सा दो भाइयों के नाम हस्तांतरित किया। रिपोर्ट के अनुसार, जमीन के कुछ हिस्से अन्य लोगों को बेचे गए और कुछ फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित किए गए। अधिग्रहण से संबंधित इंतकाल नंबर 799 का भी उल्लेख है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिक्री और अधिग्रहण के बाद रिकॉर्ड में निजी मालिकों के नाम दर्ज शेष जमीन पर भी मौके पर फोरलेन सड़क मौजूद है। इससे जमीन के वास्तविक अधिग्रहण और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हिस्सों का मिलान करने की जरूरत सामने आई है। खसरा नंबर 563/493/01 के संबंध में भी रिपोर्ट में शेष भूमि निजी मालिकों के नाम दर्ज होने का उल्लेख है, जबकि मौके पर फोरलेन सड़क मौजूद है। इस मामले में शेष भूमि के रकबे का स्पष्ट विवरण उपलब्ध रिपोर्ट से तय नहीं हो पा रहा है। संवाद
सड़क की चौड़ाई कहीं 27 तो कहीं 30 कर्म
आरडी नंबर 1807/600 के पास स्थित एक निजी होटल की जमीन की निशानदेही का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, होटल मालिक ने क्षेत्रीय कानूनगो झंडूता से निशानदेही करवाई, लेकिन संबंधित पक्ष को इसमें शामिल नहीं किया गया। नक्शे की माप में एक स्थान पर सड़क की चौड़ाई 27 कर्म और दूसरे स्थान पर 30 कर्म पाई गई। इस संबंध में पहले भी रिपोर्ट भेजे जाने का उल्लेख है।
इनसेट
इंतकाल में 44 के बजाय 54 कर्म दर्ज
फोरलेन अधिग्रहण से जुड़े इंतकाल नंबर 799 में जमीन की एक भुजा की लंबाई 44 कर्म होने के बजाय 54 कर्म दर्ज किए जाने की विसंगति भी रिपोर्ट में बताई गई है। इस संबंध में पहले रिपोर्ट भेजे जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में जमीन का विभाजन स्पष्ट नहीं होने से निजी और अधिग्रहित भूमि की सीमाएं तय करने तथा निशानदेही करने में कठिनाई होती है।
इनसेट
इंतकाल दर्ज, लेकिन विसंगतियां बरकरार
रिपोर्ट के अनुसार, फोरलेन भूमि अधिग्रहण के इंतकाल वर्ष 2015 से 2018 के बीच जमाबंदियों में दर्ज किए गए। तहसील कार्यालय ने बताया है कि अब ऐसा कोई अधिग्रहण इंतकाल लंबित नहीं है, जिसका जमाबंदी में अमल होना बाकी हो। हालांकि, इंतकाल दर्ज होने के बावजूद रिकॉर्ड में विसंगतियां होने की बात रिपोर्ट में सामने आई है। शिकायत के कुछ बिंदुओं को तहसील कार्यालय के कार्यक्षेत्र से बाहर बताया गया है। मकानों के मुआवजा आवंटन और वन भूमि में सड़क की सीमा दर्शाने वाले आरसीसी स्तंभों के सत्यापन से संबंधित विषयों पर भी कार्यालय ने अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित न होने की बात कही है।
कोट
तहसीलदार झंडूता विपन कुमार ने फोन पर बातचीत में कहा कि वह दो दिन से छुट्टी पर हैं और उन्हें इस रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। उन्होंने फाइल देखने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कही।
कोट
अभी तक रिपोर्ट मेरे पास नहीं पहुंची है। रिपोर्ट पढ़कर उसे पूरा जांचने के बाद ही तय होगा कि पूरा मामला क्या है और इसमें कार्रवाई क्या बनती है। इंतकाल खारिज हुए हैं तो इसके कारणों का भी पता लगाया जाएगा। जो भी कार्रवाई बनेगी उसे किया जाएगा।
-राज कुमार, भूमि अधिग्रहण अधिकारी,कीरतपुर नेरचौक फोरलेन परियोजना