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Bilaspur News: बरमाणा जिला परिषद वार्ड में बगावत ने बिगाड़ा गणित

Fri, 15 May 2026 11:19 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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पंचायत चुनाव
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भाजपा-कांग्रेस दोनों की बढ़ी चिंता, कांग्रेस में समर्थन को लेकर असमंजस

भाजपा में भी बागी तेवरों से मुकाबला हुआ दिलचस्प
दोनों दलों के भीतर चल रही है अंदरूनी खींचतान

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले का बरमाणा जिला परिषद वार्ड इस बार पंचायत चुनाव की सबसे चर्चित और हॉट सीट बनकर उभरा है। यहां मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान का भी बन गया है। यही कारण है कि राजनीतिक जानकार इस वार्ड को जिले का सबसे दिलचस्प मुकाबला मान रहे हैं।
इस वार्ड से कुल सात उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन असली मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवारों के साथ-साथ दोनों दलों के बागी चेहरों के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है। बगावत और समर्थन के उलझे समीकरणों ने इस सीट को पूरी तरह खुला मुकाबला बना दिया है। भाजपा ने अशोक कुमार को समर्थन देकर मैदान में उतारा है। संगठन ने उन्हें अधिकृत उम्मीदवार मानते हुए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी की है, लेकिन पार्टी के लिए चुनौती अपने ही खेमे से खड़े हुए रोहित ठाकुर बन गए हैं। भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रह चुके रोहित ठाकुर की बगावत के बाद उनके चुनाव मैदान में उतरने से पार्टी का सियासी गणित प्रभावित होता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो ऐसे में भाजपा समर्थित वोटों का विभाजन होना तय माना जा रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस खेमे में भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लंबे समय से इंटक के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं अधिवक्ता भगत सिंह वर्मा खुद को कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के रूप में प्रचारित कर रहे थे। उनके समर्थक भी यही मानकर चुनाव प्रचार में जुटे थे कि पार्टी का अप्रत्यक्ष समर्थन उन्हें ही मिलेगा। लेकिन शुक्रवार को पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। ब्लॉक कांग्रेस सदर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज के माध्यम से राजेश ठाकुर को कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद कांग्रेस समर्थकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। अब भगत सिंह वर्मा के सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने की स्थिति पैदा हो गई है। हालांकि राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वर्मा का मजदूर संगठनों और कांग्रेस विचारधारा से जुड़े वर्गों में अच्छा प्रभाव माना जाता है। ऐसे में वे कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
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इनसेट
बरमाणा वार्ड में सबसे दिलचस्प स्थिति कांग्रेस खेमे की मानी जा रही है। एक ओर अधिकृत समर्थन प्राप्त राजेश ठाकुर हैं, वहीं दूसरी ओर भगत सिंह वर्मा का व्यक्तिगत जनाधार और संगठनात्मक पकड़ चुनाव को पेचीदा बना रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि कांग्रेस समर्थक वोट दो हिस्सों में बंटते हैं तो इसका सीधा फायदा भाजपा उम्मीदवार या किसी तीसरे उम्मीदवार को मिल सकता है।
इनसेट
स्थानीय समीकरण भी होंगे अहम बरमाणा वार्ड का चुनाव केवल पार्टी समर्थन तक सीमित नहीं माना जा रहा। यहां व्यक्तिगत संपर्क, सामाजिक समीकरण और स्थानीय सक्रियता भी अहम भूमिका निभाएंगे। पंचायत चुनावों में अक्सर प्रत्याशी की व्यक्तिगत पहुंच और गांव स्तर की पकड़ निर्णायक साबित होती है। यही वजह है कि अन्य उम्मीदवार अभिषेक संख्यान, दीप चंद और नंद लाल को भी हल्के में नहीं लिया जा रहा। ये उम्मीदवार भले बड़े राजनीतिक दलों के अधिकृत चेहरे न हों, लेकिन स्थानीय स्तर पर समीकरण बिगाड़ने या बनाने की स्थिति में माने जा रहे हैं।
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इनसेट
बगावत से किसे फायदा बरमाणा वार्ड में सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों दलों में हुई बगावत आखिर किसका खेल बिगाड़ेगी और किसके लिए जीत का रास्ता खोलेगी। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने वोट बैंक को बचाने में जुटी हैं, लेकिन अंदरूनी असंतोष ने मुकाबले को पूरी तरह रोचक बना दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता पार्टी लाइन पर वोट करते हैं या फिर स्थानीय चेहरों और व्यक्तिगत प्रभाव को प्राथमिकता देते हैं। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि बरमाणा जिला परिषद वार्ड का परिणाम इस बार पूरे जिले की राजनीति में चर्चा का विषय बनने वाला है।
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