पहले दिन इंद्र के दरबार का दृश्य और नारद मोह का किया मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत मोरसिंघी में रामलीला का शुभारंभ भगवान गणेश, प्रभु श्री राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। कलाकारों और रामलीला मंडल के सदस्यों ने भी पूजा-अर्चना में भागीदारी निभाई। इसके बाद रामलीला का मंचन शुरू हुआ।
शुभारंभ सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक शंकर दास शर्मा, उनकी धर्मपत्नी सोमवती सहित रामलीला मंडल के प्रधान राहुल चौहान, निदेशक सुनील चौहान और सदस्यों ने दीप जलाकर किया। पहले दिन इंद्र के दरबार का दृश्य और नारद मोह का मंचन किया गया। इसमें दिखाया गया कि हिमालय पर्वत पर तपस्या कर रहे ब्रह्म ऋषि नारद की तपस्या को भंग करने के लिए इंद्रदेव कामदेव को भेजते हैं, लेकिन वह उनकी तपस्या भंग नहीं कर पाते। बाद में नर्तकी उर्वशी भी इस कार्य में विफल रहती है तो नारद मुनि में अभिमान आ जाता है कि उन्होंने कामदेव को जीत लिया है। इसी अभिमान में भरे नारद मुनि अपने पिता ब्रह्मा और शंकर जी और बाद में विष्णु भगवान के पास जाकर अपने अभिमान का प्रदर्शन करते हैं। इस पर भगवान विष्णु उनका अभिमान तोड़ने के लिए उन्हें मृत्युलोक की खबर लेने भेजते हैं। वहां भगवान विष्णु ऐसी मोह माया रचते हैं कि अभिमान से भरे नारद मुनि राजा शीलनिधि की राजकुमारी लक्ष्मी के साथ विवाह करने को आतुर हो जाते हैं, लेकिन भगवान विष्णु अपनी माया से नारद मुनि को वानर जैसा मुख प्रदान कर देते हैं। राजकुमारी लक्ष्मी नारद मुनि को ठुकरा देती हैं और भरी सभा में वह उपहास का पात्र बन जाते हैं। इससे आक्रोशित नारद मुनि भगवान विष्णु को श्राप देते हैं कि मृत्युलोक में लीला के दौरान इसी वानर मुख से आप को सहायता मांगनी पड़ेगी। इसके अलावा श्रवण कुमार ने अपने अंधे माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर लेकर जाने और यात्रा के दौरान सरयू नदी से पानी भरते समय महाराज दशरथ द्वारा चलाए गए तीर से श्रवण कुमार की मृत्यु हो जाने का दृश्य दिखाया। इस मौके पर रामलीला मंडल के प्रधान राहुल चौहान, निर्देशक सुनील चौहान, अच्छर पाल, शुभम चौहान, अजय जसवाल, मनीष चौहान, विकास, अंकुश, अनुराग, दीपक, शशिपाल, आदित्य, मदन लाल, अभिषेक, देशराज, संतोष कुमार आदि लोग उपस्थित रहे।