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Bilaspur News: घुमारवीं में छात्र-कन्या स्कूल मर्ज करने के फैसले पर भड़का जनविरोध

Mon, 23 Feb 2026 11:07 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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सामाजिक संगठनों ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग उठाई
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-सामाजिक, पेंशनर, किसान और वरिष्ठ नागरिक संगठन आए साथ

संवाद न्यूज एजेंसी

भगेड़ (बिलासपुर)। घुमारवीं के राजकीय छात्र और कन्या स्कूलों को मर्ज करने के प्रदेश सरकार के निर्णय के खिलाफ क्षेत्र में जन विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। विभिन्न सामाजिक, पेंशनर, किसान और वरिष्ठ नागरिक संगठनों ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर इस निर्णय को छात्राओं के हितों के प्रतिकूल बताते हुए इसे तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।

संगठनों का कहना है कि घुमारवीं का कन्या स्कूल दशकों से क्षेत्र की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है और यह विद्यालय स्थानीय समाज की शैक्षणिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। अलग से संचालित कन्या स्कूल ने छात्राओं को सुरक्षित, अनुशासित और आत्मविश्वासपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराया है। इस व्यवस्था के कारण ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के अभिभावकों में विशेष भरोसा बना हुआ है। संयुक्त बयान में कहा कि स्कूलों के विलय का निर्णय केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। संगठनों ने तर्क दिया कि अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अलग कन्या स्कूल का अपना सामाजिक महत्व होता है, जिससे छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और अभिभावकों की भागीदारी भी बनी रहती है। कहा कि इस निर्णय से छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सरकार को ऐसे संवेदनशील विषय पर व्यापक जनसंवाद और परामर्श के बाद ही निर्णय लेना चाहिए था।
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संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना चाहती है तो बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए, शिक्षकों के रिक्त पद भरे जाएं और प्रयोगशालाओं तथा पुस्तकालयों को आधुनिक बनाया जाए। पहले से सफलतापूर्वक चल रहे विद्यालयों को मर्ज करना किसी भी दृष्टि से दूरदर्शी कदम नहीं है। यदि सीबीएसई पैटर्न लागू करने की योजना है तो उसके लिए अलग से नया संस्थान स्थापित किया जाए। साथ ही प्रदेश के अपने शिक्षा बोर्ड हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को सुदृढ़ कर राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए, ताकि प्रदेश की शैक्षणिक पहचान और स्वायत्तता बनी रहे। शहरी इकाई पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन, ग्राम विकास एवं सुधार समिति पट्टा, वरिष्ठ नागरिक सभा घुमारवीं तथा हिमाचल किसान एवं जन कल्याण सभा हिमाचल प्रदेश सहित कई संगठनों ने सामूहिक रूप से इस फैसले का विरोध किया है। संगठनों के पदाधिकारियों बुद्धि सिंह, निक्का राम ठाकुर, बृजेन्द्र नाथ, सरदार भाग सिंह, रतन लाल धीमान, हेमराज महाजन, प्यारे लाल शर्मा, हरि सिंह ठाकुर, जोध सिंह ठाकुर, रूप लाल शर्मा, रमेश कुमार कैंथ, देवराज चंदेल, बीडी शर्मा ने कहा कि दोनों विद्यालयों को यथावत रखा जाए। संगठनों ने मुख्यमंत्री, मंत्री राजेश धर्माणी से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि स्कूलों के विलय से संबंधित अधिसूचना तुरंत प्रभाव से निरस्त की जाए और जनभावनाओं का सम्मान किया जाए।
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