मंडी, बिलासपुर, कुल्लू और हमीरपुर में आरवीएनएल लगाएगा आधुनिक ट्रांसफार्मर
सरकार ने बिजली वितरण व्यवस्था मजबूत करने का कार्य आरवीएनएल को सौंपा
कम वोल्टेज और ओवरलोड की समस्या से लोगों को मिलेगी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के चार जिलों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार की पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत मंडी, बिलासपुर, कुल्लू और हमीरपुर जिले में आधुनिक डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। इस परियोजना के लिए भारत सरकार के उपक्रम रेल विकास निगम लिमिटेड ने राष्ट्रीय स्तर पर ई-टेंडर जारी किया है।
योजना के पूरा होने के बाद इन जिलों में कम वोल्टेज, ओवरलोड और बार-बार बिजली बाधित होने जैसी समस्याओं में काफी हद तक सुधार आने की उम्मीद है। यह परियोजना पूरी तरह हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से आरवीएनएल को सौंपी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करना है। यह घर-घर बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम है। यह परियोजना विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जहां बिजली आपूर्ति में तकनीकी दिक्कतें हैं। कम वोल्टेज या अन्य समस्याएं लगातार बनी रहती हैं। ऐसे स्थानों पर नए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। ट्रांसफार्मरों का निर्माण, सप्लाई, परिवहन और निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने का कार्य सफल एजेंसी करेगी। सभी उपकरण हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के नवीनतम तकनीकी मानकों के अनुरूप होंगे। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाना है। प्रदेश के जिन क्षेत्रों में ट्रांसफार्मरों पर अधिक लोड, कम वोल्टेज या बार-बार बिजली गुल होने की समस्या बनी रहती है, वहां इस योजना से सीधा लाभ मिलेगा। इससे बिजली की गुणवत्ता सुधरेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर आपूर्ति मिलेगी।
इस परियोजना से बिजली की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। ट्रांसफार्मरों पर अनावश्यक दबाव कम होगा। इसके परिणामस्वरूप तकनीकी एवं व्यावसायिक नुकसान (एटी एंड सी लॉस) में भी कमी आएगी। एटी एंड सी लॉस में कमी आने से बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। यह उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति प्रदान करने में सहायक होगा। आधुनिक ट्रांसफार्मर ऊर्जा दक्षता में भी सुधार करेंगे। इससे बिजली की बर्बादी कम होगी। यह पर्यावरण के लिए भी सकारात्मक कदम होगा। यह योजना बिजली चोरी और अन्य तकनीकी हानियों को कम करने में भी मदद करेगी। आरवीएनएल की ओर से जारी टेंडर के अनुसार, इच्छुक कंपनियां 31 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे तक ऑनलाइन निविदाएं जमा कर सकेंगी। तकनीकी बोलियां उसी दिन सुबह 11:30 बजे खोली जाएंगी। निविदा दस्तावेज छह जुलाई से ई-टेंडरिंग पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इस बार प्री-बिड बैठक का प्रावधान नहीं रखा गया है। यह प्रक्रिया निविदा जमा करने वाली कंपनियों के लिए अधिक सुलभ और कुशल बनाएगी। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। इससे योग्य और सक्षम एजेंसियों का चयन हो सकेगा।
मजबूत बिजली तंत्र से उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
बिजली क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में बिजली की मांग लगातार बढ़ी है। ऐसे में वितरण तंत्र को मजबूत किए बिना गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति संभव नहीं है। आरडीएसएस के तहत शुरू की गई यह परियोजना भविष्य में चारों जिलों के हजारों उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आएगी। यह बिजली व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाएगी। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को लाभ मिलेगा। कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों को भी बेहतर बिजली आपूर्ति से फायदा होगा। यह हिमाचल प्रदेश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।