बिलासपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं घुमारवीं के पूर्व विधायक राजेश धर्माणी ने स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटालों को लेकर जयराम सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने घोटालों की निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवाने की मांग की। कोरोना काल में हुए इन घोटालों ने देवभूमि हिमाचल को शर्मशार किया है। उन्होंने नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी इस्तीफा मांगा।
वीरवार को बिलासपुर के परिधि गृह में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए राजेश धर्माणी ने कई मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटाले के बाद भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का त्यागपत्र बड़े गड़बड़झाले की ओर इशारा कर रहा है। घोटालों के लिए नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए सीएम को भी अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए था। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग उनके पास है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के इस्तीफा देने से मामला खत्म नहीं हो जाता है।
धर्माणी ने कहा कि इन घोटालों से आमजन का सरकार के प्रति भरोसा कम हुआ है। छोटे बच्चों ने अपनी गुल्लकें तोड़ कर इस विकट परिस्थिति में कोविड-19 राहत कोष में पैसे दिए। लेकिन ऐसे घोटाले सामने आने से प्रदेश की छवि को बड़ा धक्का लगा है। कहा कि बात सिर्फ स्वास्थ्य निदेशक की गिरफ्तारी तक ही खत्म नहीं होनी चाहिए बल्कि इस मामले की तह तक जाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मामले की किसी सिटिंग जज से जांच करवाई जाए। साथ ही प्रदेश के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों, जिला फेडरेशन और हिमफैड के माध्यम से हुई खरीद फरोख्त की जांच भी जांच होनी चाहिए। इस मौके पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष अंजना धीमान और वरिष्ठ नेता संदीप सांख्यान व विनोद चंदेल भी मौजूद रहे।