घुमारवीं अदालत ने शिकायतकर्ता की अर्जी की स्वीकार
संबंधित बैंक के खाते का विवरण और 65-बी प्रमाणपत्र रिकॉर्ड पर लेने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। दो लाख रुपये के कथित लेन-देन से जुड़े मामले में घुमारवीं की अदालत ने शिकायतकर्ता को बैंक खाते का रिकॉर्ड न्यायालय में पेश करने की अनुमति दे दी है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर-1 घुमारवीं ने शिकायतकर्ता की ओर से दायर आवेदन को स्वीकार करते हुए आईसीआईसीआई बैंक चंडीगढ़ से जारी खाते के विवरण और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत जारी प्रमाणपत्र को रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति प्रदान की।
मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से दायर आवेदन में कहा गया था कि संबंधित बैंक खाते का विवरण पहले उसके कब्जे में नहीं था। बैंक को अनुरोध करने के बावजूद यह दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं हो पाया था। बाद में 17 अगस्त 2024 को खाते का विवरण तथा 18 नवंबर 2024 को जारी 65-बी प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ। शिकायतकर्ता ने दलील दी कि विवाद के वास्तविक तथ्यों के निस्तारण के लिए इन दस्तावेजों का रिकॉर्ड पर होना आवश्यक है। वहीं, आरोपी पक्ष ने आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता मामले को लंबा खींचने का प्रयास कर रहा है। जवाब में आरोप लगाया गया कि प्रस्तुत किया गया खाता विवरण वर्ष 2019 से संबंधित है और आरोपी का शिकायतकर्ता के साथ कथित दो लाख रुपये के लेन-देन से कोई संबंध नहीं है। आरोपी ने यह भी कहा कि संबंधित दस्तावेज वाहन अथवा ट्रक से जुड़े खाते से संबंधित हैं तथा 18 नवंबर 2024 का प्रमाणपत्र कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता जिन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लाना चाहता है, वे मामले के विवादित तथ्यों के निर्णय के लिए महत्वपूर्ण प्रतीत होते हैं। अदालत ने यह भी माना कि इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेने से आरोपी को कोई पूर्वाग्रह नहीं होगा, क्योंकि उसे संबंधित गवाहों से जिरह करने का पूरा अवसर मिलेगा।
अदालत ने आवेदन को स्वीकार करते हुए शिकायतकर्ता को आईसीआईसीआई बैंक द्वारा जारी खाते का विवरण और 65-बी प्रमाणपत्र रिकॉर्ड पर पेश करने की अनुमति दे दी। साथ ही आदेश दिया कि आवेदन को मुख्य वाद पत्र के साथ संलग्न किया जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 05 सितंबर 2026 निर्धारित की है। न्यायालय ने शिकायतकर्ता पक्ष को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए सात दिन के भीतर कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं।