500 और 1000 के नोट जमा करवाने के लिए लगी लोगों की कतारें
- फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार के 500 और एक हजार रुपये के नोट बंद करने के बाद वीरवार को खुले बैंकों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग सुबह आठ बजे से ही लाइनों में खड़े हो गए थे। जैसे ही बैंक खुला लोगों ने पैसा जमा करवाना और एक्सचेंज करवाना शुरू कर दिया।
वहीं बैंकों ने भी पैसा जमा करवाने के लिए पुख्ता प्रबंधन किए थे। जिला में करीब 50 से अधिक बैंक है और जानकारों की मानें तो पहले ही दिन करीब 20 करोड़ रुपये लोगों ने बैंकों में जमा करवाए हैं।
हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। कोई थर्ड पार्टी के खाते में पैसा जमा नहीं करवा सकता था। पैसा जमा करवाने और एक्सचेंज के लिए आईडी का होना अनिवार्य किया गया था। दूसरों के खातों में पैसा जमा करवाने आए लोगों के पास अथॉरिटी लेटर न होने के कारण वह पैसा जमा नहीं करवा पाए।
अमर उजाला की टीम ने दोपहर बाद रियलिटी चैक के लिए थर्ड पार्टी के खाते में पैसा जमा करवाने का प्रयास किया तो बैंक में मौजूद कर्मी ने पैसा जमा करने से साफ मना कर दिया। वहीं दिन भर लाखों रुपये दबाकर बैठे लोग पैसा ठिकाने लगाने में जुगाड़ तलाशते रहे। यहां तक की ऐसे लोग 10 लाख के बदले सात लाख तक लेने को तैयार थे। वहीं काला धन दबाकर बैठे केंद्र सरकार के इस फैसले से हड़कंप मच गया है।
बहन की शादी के लिए चाहिए थे पैसे : जय देई, प्रोमिला, सोहन लाल और श्याम लाल का कहना है कि दो दिनों से उनके पास पैसे नहीं थे। पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने के कारण वह कहीं भी कोई खरीदारी नहीं कर पा रहे थे। घर का राशन और सब्जी तक खरीदने के लाले पड़ गए थे। उन्होंने कहा कि वह सुबह 9 बजे ही लाइन में लग गए थे। प्रवासी मजदूर गंगूराम ने बताया कि बहन की शादी है। खरीदारी के लिए पैसा चाहिए था। इसको लेकर वह सुबह ही बैंक आ गए हैं।
उपायुक्त ने खुद संभाला मोर्चा : लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए उपायुक्त बिलासपुर ऋग्वेद ठाकुर ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने सभी बैंकों का निरीक्षण किया। लोगों से बातचीत करके पूछा की पैसा बदलने में कोई दिक्कत तो नहीं आ रही है। वहीं बैंक प्रबंधन को भी लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न आने देने को लेकर कड़े निर्देश दिए गए।