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Bilaspur News: रुक्मिणी कुंड का जल पीएंगे चंडीगढ़–मनाली फोरलेन पर सफर करने वाले यात्री

Tue, 30 Sep 2025 11:12 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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औहर के पास बनाया जा रहा रूकमणी कुंड से संचालित प्याऊ। स्रोत: डीपीआरओ
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औहर के पास जल शक्ति विभाग घुमारवीं ने लगाया प्याऊ
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आधुनिक तकनीक के तहत यूवी ट्रीटमेंट से शुद्ध किया गया है पानी
स्क्रीन पर रियल टाइम में प्रदर्शित होगी पानी की गुणवत्ता की जानकारी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। चंडीगढ़–मनाली फोरलेन पर सफर करने वाले यात्री अब औहर के पास रुक्मिणी कुंड का पवित्र पानी पीएंगे। यात्रियों और राहगीरों के लिए यह नया प्याऊ बनाया गया है। मंत्री राजेश धर्माणी की पहल पर इसे स्थापित किया गया। इसकी सबसे खास बात यह है कि यहां मिलने वाला पेयजल बिलासपुर जिले के पौराणिक रुक्मिणी कुंड से लाया जा रहा है, जिसे आधुनिक तकनीक के तहत यूवी ट्रीटमेंट से शुद्ध किया गया है।
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इसके साथ ही इस स्थान पर लगी बड़ी स्क्रीन पर पानी की गुणवत्ता की जानकारी रियल टाइम में प्रदर्शित होगी, जिससे उपभोक्ता सीधे इसकी शुद्धता देख सकेंगे। जिले का रुक्मिणी कुंड प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था से जुड़ा स्थल है। मान्यता है कि प्राचीन काल में जब इस क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा, तो रुक्मिणी नामक महिला ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनके बलिदान के फलस्वरूप यहां जलधारा फूट पड़ी, जिसने पूरे क्षेत्र की प्यास बुझाई। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां का जल औषधीय गुणों वाला माना जाता है और त्वचा संबंधी रोगों में लाभकारी समझा जाता है। मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि औहर का यह प्याऊ केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। इससे नई पीढ़ी न केवल संस्कृति और परंपराओं से जुड़ेगी, बल्कि जल संरक्षण का महत्व भी समझेगी। प्याऊ स्थल पर लगी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से सरकार की योजनाओं की जानकारी भी लोगों तक पहुंचेगी। मंत्री ने कहा कि जल जीवन का आधार है और प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि इसे व्यर्थ न बहाए। औहर का यह प्याऊ जहां लाखों पर्यटकों व राहगीरों की प्यास बुझाएगा, वहीं उन्हें सांस्कृतिक धरोहर, आस्था और जल संरक्षण का संदेश भी देगा। जल शक्ति विभाग घुमारवीं के अधिकारियों ने बताया कि इस प्याऊ का उद्घाटन शीघ्र ही किया जाएगा और इसके बाद इसे आम जनता व पर्यटकों को समर्पित कर दिया जाएगा। कहा कि यह पहल जिले की सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान देने के साथ यात्रियों और श्रद्धालुओं को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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