-65 वर्षों से विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे विस्थापित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाखड़ा विस्थापित समिति के महासचिव जेके नड्डा ने मांग उठाई है कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन को परियोजना से हर माह हो रही करोड़ों रुपये की आय का एक हिस्सा विस्थापितों के पुनर्वास और उत्थान पर खर्च करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 65 वर्षों से विस्थापित विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं और अब उन्हें राहत देने के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है।
नड्डा ने कहा कि हिमाचल में बनी अन्य परियोजनाओं के विस्थापितों को जहां आर्थिक लाभ और बुनियादी सुविधाएं दी गई हैं, वहीं देश की सबसे बड़ी और पहली परियोजनाओं में शामिल भाखड़ा प्रोजेक्ट के विस्थापित आज भी उपेक्षित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कंपनी और सरकार के बीच विस्थापितों के कल्याण को लेकर कोई स्पष्ट लिखित समझौता नहीं हुआ, जिससे उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि अन्य परियोजनाओं की तर्ज पर भाखड़ा विस्थापितों को भी परियोजना से होने वाली आय में हिस्सा, बेहतर बस्तियां, सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। आधे-अधूरे पुनर्वास और संसाधनों की कमी के कारण विस्थापित अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और अवसर नहीं दे पाए, जिससे बिलासपुर क्षेत्र विकास की दौड़ में पीछे रह गया।
नड्डा ने सरकार से मांग की कि विस्थापितों के लिए दो अलग सेक्टर विकसित किए जाएं, बिलासपुर नगर के विकास के लिए कम से कम 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाए और बिजली-पानी मुफ्त उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा सड़कों, गलियों और नालियों की मरम्मत, नियमित रखरखाव, शहर में पौधरोपण, बंदला हिल के लिए रोपवे निर्माण और बैरी-दड़ोला पुल के निर्माण को भी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि इन मांगों पर गंभीरता से अमल किया जाए तो जिले के हजारों विस्थापित परिवारों को राहत मिल सकती है।