सिल्ह में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालु। स्रोत: जागरूक पाठक।
सिल्ह में श्रीमद्भागवत कथा का हुआ आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं के गांव सिल्ह में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य अरुण मोदगिल ने भगवान की दिव्य एवं अतुलनीय लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। उनके ओजस्वी वाणी और सरल उदाहरणों से कथा स्थल भक्ति रस में सराबोर हो उठा।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीवन और मृत्यु दोनों का गूढ़ संदेश देती है। यह हमें सिखाती है कि इस संसार में रहते हुए किस प्रकार धर्म, कर्म और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार सुबह घर से निकला व्यक्ति यदि शाम को वापिस लौट आता है तो उसे मृत्यु नहीं कहा जाता, बल्कि वह अपनी दिनचर्या पूरी कर घर वापस आता है। उसी प्रकार हम प्रतिदिन अपने कार्यक्षेत्र में समय निकालते हैं, तो हमें भगवान के भजन, स्मरण और साधना के लिए भी नित्य समय अवश्य निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल बड़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों में भी बचपन से ही अच्छे संस्कार, नियम और सेवा की भावना विकसित करनी चाहिए। माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वह स्वयं भी भक्ति और सदाचार का पालन करें, ताकि बच्चे उन्हें देखकर वही संस्कार अपनाएं। इससे परिवार में प्रेम, सेवा और संस्कारों की मजबूत नींव पड़ती है। उन्होंने कहा कि भौतिक जगत की यात्रा में हम सभी साथ-साथ चलते हैं, लेकिन इस संसार से आगे की यात्रा प्रत्येक व्यक्ति को अकेले ही करनी होती है। उस यात्रा में केवल हमारे कर्म और भक्ति ही हमारे साथ जाते हैं। इसलिए जीवन में भगवान का भजन, नाम स्मरण और सत्कर्म अत्यंत आवश्यक है, ताकि आगे की यात्रा में भगवान स्वयं हमारे साथ रहें और हमें सद्गति प्रदान करें। आयोजकों ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक जागरण, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करना है।