पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव संपन्न हो गए हैं। चुनाव नतीजे निकलने के बाद बीडीसी, जिला परिषद और नगर निकायों पर कब्जे के लिए कांग्रेस और भाजपा में खूब सियासत चली। जिला परिषद, बीडीसी और नगर निकायों का गठन हो गया है। कहीं भाजपा ने बाजी मारी है तो कहीं कांग्रेस ने लेकिन अब वक्त जिम्मेदारी का आ गया है। जनता ने विकास की उम्मीद के लिए अपने जनप्रतिनिधि चुने हैं। अब चुने हुए प्रतिनिधियों को जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। ऐसा भी नहीं है कि जनप्रतिनिधियों के पास वक्त कम है। जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए उन्हें पूरे पांच साल का समय मिला है। ऐसे में लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए जनप्रतिनिधियों को लड़ाई प्रशासन और सरकार के साथ लड़नी होगी।
बिलासपुर में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव का शोर थम गया है। शनिवार को जिला परिषद, बीडीसी और विभिन्न पंचायतों के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने अपना-अपना कार्यभार संभाल लिया। अगले पांच साल तक की बागडोर अब नए प्रतिनिधियों के हवाले रहेगी। कुर्सी तो मिल गई लेकिन इसके पीछे बड़ी जिम्मेदारी का बोझ भी है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ढेर सारी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
आवारा पशु फसलों को चट कर रहे हैं। लोग खेती छोड़ने को विवश हैं तो कई गांवों में सड़क का नहीं पहुंचना, पिछड़ेपन का अहसास करवा रहा है। गर्मियों में पेयजल संकट गहराने से लोग पानी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को विवश हो जाते हैं। गलियों को रोशन करने के लिए स्ट्रीट लाइटों की दरकार है। ऐसी कई चिर-परिचित समस्याएं हैं, जिन्हें दूर करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को ठोस कदम उठाने होंगे।
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नगरों को बनाना होगा सही मायने में नगर
बिलासपुर। नगर निकायों की हालत सबसे खस्ता है। बिलासपुर, घुमारवीं और नयनादेवी नगर परिषद हैं तो शाहतलाई नगर पंचायत। हालात यह है कि चारों ही नगरों में कई ऐसे वार्ड भी हैं जो सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। कई स्थानों पर गलियों में अंधेरा रहता है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से शहरों को नहीं जोड़ा गया है। इससे गंदगी जहां-तहां फैल रही है। लिहाजा, नगर निकायों के नए अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को भी सही मायने में नगरों को नगर बनाने के लिए अभी से कबायद छेड़नी होगी।
स्वच्छ भारत मिशन कैसे होगा पूरा
बिलासपुर। शहरों में सफाई की माकूल व्यवस्था नहीं हैं। शहर की ऐसी कोई गलि या मोहल्ला नहीं जहां कूड़ेदान के इर्द-गिर्द गंदगी के ढेर न लगे हों। गंदगी में आवारा पशुओं को कुछ खाने के लिए मुंह मारते हुए भी अक्सर देखा जाता है। शौचालयों की हालत खस्ता है। घुमारवीं में तो गारवेज ट्रीटमेंट प्लांट ही नहीं बन पाया। ऐसे में स्वच्छ भारत मिशन का सपना कैसे साकार होगा। इस बारे में भी नव निर्वाचित पार्षदों और अध्यक्ष-उपाध्यक्षों को मंथन करने की जरूरत है।
क्या कहते हैं मतदाता
मतदाता सुशांत, सुनील, विवेक कुमार, अशोक कुमार, विजय कुमार, अभिषेक, सुनीता, अनिता ने कहा कि पंचायत चुनावों में सभी ने इसी आस के साथ वोट दिया है कि जन प्रतिनिधि अब उनके इलाके का विकास करवाएंगे। मतदाताओं ने वोट देकर अपना फर्ज निभा दिया है। अब बारी जन प्रतिनिधियों की है। उन्हें भी अब जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा।
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