प्रधान, उप प्रधान और पांचों वार्ड सदस्य पद पर नहीं है कोई मुकाबला
ग्रामीणों ने पूर्व में बैठक कर सर्वसम्मति से चुने हैं प्रतिनिधि
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं की नवगठित छंदोह पंचायत ने अपने गठन के साथ ही लोकतंत्र, भाईचारे और आपसी सहमति की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी अब पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। जिले की यह पहली ऐसी पंचायत बन गई है, जहां प्रधान, उप प्रधान और सभी वार्ड सदस्य निर्विरोध चुने गए हैं। खास बात यह रही कि पंचायत के लोगों ने चुनावी प्रतिस्पर्धा से दूर रहकर पंचायत की भलाई और विकास को प्राथमिकता दी।
बताते दें कि बीती 12 अप्रैल को पंचायत के लोगों ने एक विशेष बैठक की थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधान मेहर सिंह ने की। इस बैठक में पंचायत के पांचों वार्डों के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद थे। बैठक के दौरान आपसी सहमति और सर्वसम्मति से पंचायत प्रधान, उप प्रधान तथा पांचों वार्डों के सदस्यों का चयन कर लिया गया था। बैठक में सुभाष रनौत को प्रधान, बलजीत कश्यप को उप प्रधान चुना गया। वहीं जसवानी वार्ड से सोनू, छंदोह वार्ड से ओंकार, डोहरु वार्ड से पूनम, मरयानी वार्ड से प्रकाश और पन्याली वार्ड से वनिता को वार्ड सदस्य के तौर पर चुना गया था। सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल करने के अंतिम दिन यही सभी लोग अपने-अपने पदों के लिए नामांकन भरने पहुंचे। पंचायत क्षेत्र के किसी अन्य व्यक्ति ने न तो प्रधान, न उप प्रधान और न ही किसी वार्ड सदस्य पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। किसी भी पद के लिए कोई विरोधी उम्मीदवार सामने नहीं आया। इसी कारण पूरी पंचायत निर्विरोध चुनी गई और नई पंचायत ने इतिहास रच दिया। उल्लेखनीय है कि छंदोह पंचायत का गठन पहली बार पूर्व की पडयालग और दधोल पंचायतों के पांच गांव छंदोह, जसवानी, मरयानी, डोहरु और पन्याली को मिलाकर किया गया है। नई पंचायत के गठन के बाद ग्रामीणों की ओर से जिस प्रकार एकजुट होकर बिना किसी चुनावी मुकाबले के प्रतिनिधियों का चयन किया गया, उसे क्षेत्र में लोकतांत्रिक परिपक्वता और सामाजिक एकता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनावों में अक्सर गांवों में गुटबाजी और तनाव की स्थिति बन जाती है, लेकिन छंदोह पंचायत के लोगों ने विकास और भाईचारे को सर्वोपरि रखते हुए एक नई शुरुआत की है।