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Bilaspur News: रविवार को जिले में आठ सरकारी और 24 निजी रूटों पर नहीं चली बसें

Sun, 30 Nov 2025 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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संशोधित खबर
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अभियान बे-बस जिंदगी भाग 2
बसों के अभाव में आवागमन के लिए बेबस हो रही ग्रामीणों की जिंदगी
न्यूनतम किराया बढ़ोतरी के बाद भी छुट्टी वाले दिन नहीं चलती हैं 50 फीसदी बसें
घंटों करते हैं बस का इंतजार, किराये के वाहन से करते हैं यात्रा

संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। जिले में छुट्टी के दिन सरकारी और निजी बसों की भी छुट्टी रहती है। रविवार को जिले में आठ सरकारी और 24 निजी रूटों पर बसें नहीं चलीं। ऐसे में ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। तमाम लोगों को किराये के वाहन से यात्रा करनी पड़ी।
प्रदेश में न्यूनतम बस किराया 10 रुपये होने के बाद बस संचालकों को आर्थिक राहत मिली है जबकि आम जनता को बढ़ा किराया देने के बावजूद सेवाओं में कोई सुधार नहीं मिला है। हालात यह हैं कि रविवार और छुट्टी वाले दिन कई रूटों पर बसें पूरी तरह ठप रहती हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोग घंटों इंतजार करते रह जाते हैं। रविवार को बिलासपुर से डाबर, नगराओं, झंडूता, ऋषिकेश, पिपलुघाट, बंदला, घुमारवीं के लिए चलने वाले कई सरकारी बस रूट बंद रहे। वहीं घुमारवीं से तरघेल, तड़ोंन, लेहरी, जबलु के लिए चलने वाले रूटों पर भी बसें नहीं चल पाई। वहीं जिले भर में दो दर्जन से अधिक निजी रूटों पर बसें नहीं चलीं। निजी बसों के बरठीं, जाहु, कुठेड़ा, बरोटा, भराड़ी, लदरौर, सुन्हाणी, शाहतलाई, बिलासपुर, बरमाणा, घाघस, बैरी से खारसी और द्रोबड़, ढलोह, मोरसिंघी रूटों पर बसें न चलने से यात्रियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। रविवार को आमदनी कम होने के चलते बस मालिक रूटों पर बसें चलाने से परहेज करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग और सरकार ने किराया तो बढ़ा दिया लेकिन रूटों पर बसें भेजना सुनिश्चित नहीं किया। छुट्टियों में ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन ठहर जाता है। कई क्षेत्रों में केवल एक ही बस रूट है जो रविवार को बंद होने से आवाजाही पूरी तरह ठप कर देता है। बसें न चलने से लोग महंगे दाम पर टैक्सी में सफर करने को मजबूर हैं जिससे आम और मध्यमवर्गीय परिवार परेशान हैं। कई यात्रियों ने बताया कि एक यात्रा में ही 300 से 800 रुपये तक खर्च हो जाता है जबकि बस से वही यात्रा 20-30 रुपये में पूरी होती है। हैरानी की बात यह है कि झंडूता विधानसभा क्षेत्र के गेहड़वीं के लिए मात्र दो सरकारी बसें हैं। एक सुबह तड़के निकलती है और एक शाम को जाती है। इस बीच निजी बसों के ही रूट हैं जो मनमानी से चलते हैं। इससे जनता को और परेशानी होती है जबकि रविवार को निजी बसें न के बराबर ही अपने रूट पर चलती हैं।
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इनसेट
आपात स्थितियों में भारी दिक्कत
रविवार को बसें न चलने के कारण मरीजों को अस्पताल ले जाना, प्रतियोगी परीक्षाएं, जरूरी सामान खरीदने जैसी कामों में भी दिक्कत बढ़ जाती है। अनेक बार लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़कों तक पहुंचना पड़ता है।

इनसेट
स्टाफ और नुकसान का हवाला देकर बसें बंद
निजी बस संचालक यात्रियों की कमी और एचआरटीसी के घाटे वाले रूट का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि दोनों के बीच वे पिस रहे हैं। किराया बढ़ाने के बाद उम्मीद थी कि सेवा में सुधार होगा, लेकिन रूटों में कटौती ने समस्या बढ़ाई है।इनसेट
ग्रामीण प्रतिनिधियों ने उठाई आवाज
घुमारवीं उपमंडल के तहत गाहर पंचायत के प्रधान तारा चंद, गतवाड़ पंचायत उप प्रधान अजय शर्मा और मरहाणा पंचायत के पूर्व पंचायत प्रधान पृथी चंद ने कहा कि अवकाश वाले दिन बस संचालक रूटों पर बसें नहीं चलाते। इससे ग्रामीण पैदल या टैक्सी लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। बस किराये में बढ़ोतरी तो कर दी गई लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं मिला।
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अभियान बे-बस जिंदगी को बताएं समस्या
सरकारी बसों की दयनीय हालत, रूटों की अव्यवस्था और निजी बसों की बढ़ती मनमानी के मुद्दे को उठाते हुए अमर उजाला ने ‘बे-बस जिंदगी’ अभियान शुरू किया है। अगर किसी की कोई समस्या हो तो 93687-24191 पर फोटो और समस्या मैसेज में भेजें।

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