ऋषि मार्कंडेय में अक्षय तृतीया पर बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार करते हुए। स्रोत: जागरूक पाठक।
उद्देश्य: बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ना, लोगों को को हिंदू संस्कृति का ज्ञान कराना
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ हिमाचल के सौजन्य से उत्तर भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ऋषि मार्कंडेय में अक्षय तृतीया के अवसर पर यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया गया।
इस अवसर प्रदेश के 151 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार किया गया। यह आयोजन पिछले साल से संघ की तरफ से हर साल निशुल्क किया जाता है। सनातन धर्म की रक्षा के लिए, बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए, जनमानस को हिंदू संस्कृति से रूबरू करने के उद्देश्य से यह संस्कार आयोजित किया गया। यह संस्कार विवाह से पूर्व किया जाता है। इस अवसर पर यज्ञोपवीत संस्कार के अलावा कर्ण भेद संस्कार, समावर्तन संस्कार, वेदारंभ आदि संस्कार किए गए। सनातन धर्म में इन संस्कारों का का बहुत महत्व है। इस संस्कार के आयोजन पर सभी बटुकों सहित यहां पर उपस्थित आगंतुकों के लिए फलाहार और भोजन की व्यवस्था संघ की ओर से की गई थी। कार्यक्रम सुबह 6 बजे से शुरू हुआ और शाम को 5 बजे तक चला। संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन शांडिल्य ने बताया कि इसका उद्देश्य संस्कृत एवं संस्कृति का संरक्षण करने, सनातन धर्म से लोगों जोड़ने अपनी संस्कृति से रूबरू करने का है। इस अवसर पर संस्था के महासचिव पंडित अरुण दत्त पुरोहित आदि उपस्थित रहे।