-श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में कथावाचक पंडित सुशील कुमार ने पंचाक्षर यानी ऊं नम: शिवाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वेदों और पुराणों के अनुसार शिव अर्थात सृष्टि के सृजनकर्ता को प्रसन्न करने के लिए सिर्फ ऊं नम: शिवाय का जप ही काफी है। इस मंत्र के जप से सभी दुख, कष्ट समाप्त हो जाते हैं।
हृदय में ऊं नम: शिवाय का मंत्र समाहित होने पर संपूर्ण शास्त्र ज्ञान और शुभ कार्यों का ज्ञान स्वयं ही प्राप्त हो जाता है। श्रावण माह में स्वयं भगवान शिव माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी और अपने शिवगणों सहित पृथ्वी पर विराजते हैं। श्रावण माह शिव भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। शिव भक्त भोलेनाथ की विधिविधान से पूजा कर उनका आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार मां पार्वती भोलेनाथ से पूछती हैं कि कलयुग में समस्त पापों को दूर करने के लिए किस मंत्र का आशय लेना चाहिए। भगवान शिव कहते हैं कि प्रलय काल में जब सृष्टि में सब समाप्त हो गया था, तब मेरी आज्ञा से समस्त वेद और शास्त्र पंचाक्षर में विलीन हो गए थे। सबसे पहले शिवजी ने अपने पांच मुखों से यह मंत्र ब्रह्माजी को प्रदान किया था। शिव के पंचाक्षर मंत्र से सृष्टि के पांचों तत्वों को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मंत्र का जाप शिवालय, तीर्थ या घर में साफ, शांत और एकांत जगह बैठकर करना चाहिए। कथा समापन पर प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर परिसर में प्रतिदिन 9 मार्च को दोपहर 2 से 5 बजे तक कथा का आयोजन होगा। उस दिन दोपहर 3:00 बजे से अटूट भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।