मछुआरों ने मत्स्य पालन विभाग और ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोला
ज्योरी पत्तन घाट पर वीरवार को बड़ी संख्या में एकत्रित हुए मछुआरे
संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट (बिलासपुर)। गोबिंद सागर झील में समय पर मछली नहीं उठाने से गुस्साए नौ सोसायटियों के पदाधिकारियों, मछुआरों ने मत्स्य पालन विभाग और ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
गोबिंद सागर झील के ज्योरी पत्तन घाट पर वीरवार को बड़ी संख्या में एकत्रित हुए नौ सोसायटी के पदाधिकारियों, मछुआरों ने बताया कि स्थानीय मछुआरे सरकार को प्रति किलो के हिसाब से मछली खरीद पर 15 रुपये रायल्टी देते हैं। यही नहीं, इससे ज्यादा मछली खरीद करने पर सरकार को भी ज्यादा रॉयल्टी से कमाई होती है।
सभाओं के पदाधिकारियों सोहन लाल, सरवण कुमार, ईश्वर दास, बाबू राम, गोरखी राम, बलराज और विजय पाल का कहना है कि बावजूद इसके भी बाहरी राज्यों के व्यापारी हिमाचल में चोरी छुपे आकर सस्ते दामों में मछली बेचकर चले जाते हैं। बाहरी राज्यों के यह मछली व्यापारी बिना किसी पंजीकरण के काम कर मत्स्य पालन विभाग को चूना लगा रहे हैं। इन्होंने कहा कि जब तक गोबिंद सागर झील की सारी मछली को नहीं उठाया जाता है, उस समय तक बाहर से मछली का व्यापार करने वालों पर लगाम लगाई जाए।
उन्होंने बताया कि रोजाना गोबिंद सागर झील में एकत्रित की जा रही मछली को ठेकेदार द्वारा समय पर नहीं उठाने से, मनमर्जी-आनाकानी करने से स्थानीय मछुआरों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। गोबिंद सागर झील में मत्स्य से जुड़े स्थानीय मछुआरों को काफी मछली खराब होने का भय सताने लगा है। जिस कारण उनको रोजी रोटी का संकट का खतरा मंडराने लगा है। उधर, मामला मीडिया में आने की भनक लगते ही मत्स्य विभाग बिलासपुर ने हरकत में आते हुए तुरंत ठेकेदार को स्थानीय सोसाइटी के मछुआरों की सारी मछली उठाने के आदेश दिए हैं, जिससे मछुआरों ने राहत की सांस ली है।
मत्स्य व्यवसाय से जुड़े फिशरीज सोसाइटी के सदस्यों, स्थानीय मछुआरों की समस्या पर विभाग गंभीरता से नजर बनाए हुए है। उन्हें किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं उठाना पड़े, इसके लिए बाहरी राज्यों से चोरी-छुपे व्यवसाय करने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा।
-पंकज ठाकुर, सहायक निदेशक, निदेशालय मत्स्य विभाग बिलासपुर