मांगों को लेकर पांच दिन से आमरण अनशन पर बैठे कामगार की शुक्रवार को हालत बिगड़ने से क्षेत्र के लोग भड़क गए। हालत यह थी कि अनशन पर बैठे कामगारों की हालत देखकर परिजन फूट-फूटकर रो पड़े।
इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने जमथल टाउनशिप की घेराबंदी कर दी। इस मौके पर लोगों ने एनटीपीसी के निदेशक को काले झंडे दिखाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम बिलासपुर भी मौके पर पहुंचे।
कामगारों और ग्रामीणों ने एनटीपीसी प्रबंधन को चेतावनी दी की जब तक मजदूरों की मांगों को नहीं माना जाता तब तक न ही टाउनशिप से कोई एनटीपीसी अधिकारी बाहर जाएगा और न ही एनटीपीसी की कोई गाड़ी भीतर आएगी। लोगों के इस गुस्से के कारण एनटीपीसी प्रबंधन को मजबूरन मजदूरों की वार्ता निदेशक से करवानी पड़ी।
मगर हर बार की तरह एनटीपीसी निदेशक ने यह बोल कर हाथ खड़े कर दिए की वो मजदूरों की मांगों का समाधान नहीं कर सकते। मगर मजदूरों के ज्ञापन की वो समीक्षा करेंगे।
कोल बांध महाप्रबंधक का पुतला जलाया
शुक्रवार को विरोध स्वरूप लोगों और मजदूरों ने मिलकर जमथल टाउनशिप में एनटीपीसी कोलबांध महाप्रबंधक के पुतले को जूतों का हार पहनाकर और शंख ध्वनि करके जलाया। इस दौरान वहां लोगों को संबोधित करते हुए आमरण अनशन पर बैठे सुमन कुमार की तबीयत बिगड़ गई और वह चक्कर खाकर गिर पड़े।
इससे लोगों में एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ गुस्सा और भड़क गया। कोल डैम वर्कर यूनियन के कानूनी सलाहकार सुमन ठाकुर ने कहा की जब एनटीपीसी के कोल बांध परियोजना में बैठे अधिकारी मजदूरों की बात नहीं सुनते थे, तब उन्हें उम्मीद थी की नोएडा में बैठे आलाधिकारी उनकी मांगों को पूरा करेंगे। मगर जब एनटीपीसी के निदेशक मंडल के मेंबर भी इस तरह से अपनी जिम्मेदारियों से बचने लगे तो मजदूरों के पास आंदोलन के सिवा कोई रास्ता नहीं रहता।
उपप्रधान जगदीश ठाकुर ने कहा कि अगर एनटीपीसी ने कंपनी के हित में कोई फैसला लेना हो तो वो किसी से कोई वार्ता नहीं करती और विस्थापित कामगारों को 22000 से 5000 तक के वेतन पर पहुंचा देती है। मगर उन्हीं कर्मचारियों के लिए स्थायी रोजगार के सवाल पर सबके हाथ खड़े हो जाते है। धौंन कोठी पंचायत के उपप्रधान शंकर सिंह ने कहा कि वो इस संघर्ष में मजदूरों के साथ हैं।
विधायक के खिलाफ भी किया रोष प्रकट
स्थानीय लोगों ने इस बात पर विधायक बंबर ठाकुर के खिलाफ भी रोष प्रकट किया कि है कि 21 दिन की हड़ताल और 5 दिन के आमरण अनशन के बावजूद वो लोगों के बीच नहीं पहुंचे। लोगों का कहना है कि विधायक की जिम्मेवारी भी बनती है कि वह लोगों और मजदूरों का साथ दें।