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अब आखिरी सांस तक लड़ेगें हक की लड़ाई

Mon, 11 Jul 2016 11:50 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बरमाणा(बिलासपुर)।
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protest - फोटो : अमर उजाला
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जहां एक ओर प्रदेश के सीएम वीरभद्र सिंह जिला में करोड़ों की विकास योजनाओं का शिलान्यास कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर मांगों और अधिकारों की लड़ाई को लेकर कोल बांध विस्थापित आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर हैं।
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कामगारों को आंदोलन करते हुए 17 दिन हो गए हैं। मगर उनकी बात सुनने और मांगों को पूरा करने के लिए कोई तैयार नहीं। पहले कामगारों ने हड़ताल शुरू की और फिर क्रमिक अनशन लेकिन फिर भी मांगों को नहीं माना गया तो मजबूरी में सोमवार से आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होना पड़ा।

कोल बांध परियोजना में विस्थापित और प्रभावित मजदूरों की हड़ताल 17वें दिन में प्रवेश कर गई है। सोमवार को मजदूरों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। मजदूर नेता परवेश चंदेल, कोल डैम वर्कर यूनियन कोषाध्यक्ष आशीष गौतम, सुमन, सुरेश और कमल अनशन पर बैठे। उन्होंने मजदूरों की मांगों के लिए कसम ली कि अपनी आखिरी सांस तक मजदूरों की इस लड़ाई को गांधीवादी तरीके से लड़ेंगे।
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मजदूर नेता परवेश चंदेल ने कहा कि हड़ताल के 17 दिन बाद भी एनटीपीसी प्रबंधन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी हैं। मजदूर 40 डिग्री तापमान में भूखे प्यासे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और एनटीपीसी के अधिकारी एयर कंडिशनर कमरों में बैठकर झूठे दावे कर रहे हैं कि मजदूरों से बात करने की कोशिश कर रहे हैं।

वर्कर यूनियन प्रधान अनूप कुमार ने कहा कि एनटीपीसी प्रबंधन के उच्च अधिकारियों ने हड़ताल के दौरान थोड़ी सी कोशिश भी नहीं की कि यह मामला सुलझे, बल्कि इसके विपरीत प्रबंधन और ठेकेदार नए लोगों को काम पर रख रहे हैं।
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ये हैं मांगे
कोलबांध परियोजना में विस्थापित व प्रभावितों को स्थाई रोजगार
ठेकेदारी प्रथा बंद करना
एनटीपीसी के अंदर सीधा रोजगार
मजदूरों का न्यूनतम मासिक वेतन 30 हजार हो
कोल बांध परियोजना में श्रम कानून लागू हो
निकाले गए वर्कर की बहाली
एनटीपीसी अस्पताल में मजदूरों और उनके परिवारों को मुफ्त चिकित्सा मिलना
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