बिलासपुर (रामपुर)। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद क्षेत्र के कई गांवों में किसानों ने खेतों में पराली जलाई। 25 गांवों में पराली जलाने का मामला सैटेलाइट ने तो पकड़ा, मगर निगरानी को तैनात किए गए लेखपाल पराली जलाने के मामलों को पकड़ नहीं सके। एसडीएम ने 25 गांवों के 19 लेखपालों को ड्यूटी के प्रति उदासीन माना है और सभी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
धान की पराली जलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया है। प्रदेश सरकार ने भी हर जिले के डीएम को पराली जलाने से रोकने की हिदायत दी है। डीएम ने हर गांव में लेखपालों, पुलिस व विकास विभाग के कर्मियों को तैनात कर आदेशों का अनुपालन कराने के निर्देश सभी एसडीएम को दिए हैं। इसके बाद भी क्षेत्र में पराली जलाने का दस्तूर बरकरार है। अब तक क्षेत्र के 25 गांवों में पराली जलाने के 31 मामले सैटेलाइट के जरिए पकड़े गए। जिले से आए कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ स्थानीय राजस्व कर्मियों ने मौका मुआयना किया तो सैटेलाइट की रिपोर्ट ठीक पाई गई। ऐसे में एसडीएम डॉ. राजेश कुमार ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए सभी 25 गांवों के 19 लेखपालों को लापरवाह माना है। उन्होंने कहा है कि अगर क्षेत्र में पराली जलाई गई तो उनके लेखपालों को जानकारी क्यों नहीं हुई? जबकि, हर गांव में टीम तैनात की गई हैं। ऐसे में कहीं न कहीं लेखपाल की लापरवाही उजागर होती है। उन्होंने सभी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। उन्होंने संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। वहीं, लेखपाल प्रेमशंकर ने देवीपुरा के किसान रिहान अली के खिलाफ पराली जलाने की रिपोर्ट लिखाई है। वहीं, भोट क्षेत्र के लोगों ने शनिवार की रात करीब साढ़े छह बजे थाने के सामने एक किसान द्वारा खेत में धान की पराली जलाने का आरोप भी लगाया है। लोगों ने मामले की शिकायत पुलिस से भी की है।